शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि हजारों साल से एससी-एसटी समाज के लोग हाशिए पर हैं। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अपने फैसले की समीक्षा करे। बता दें कि वर्ष 2006 के नागराज फैसले में प्रमोशन में आरक्षण पर कहा गया था कि राज्य अनुसूचित जातियों और जनजातियों को सरकार नौकरी के दौरान प्रमोशन में आरक्षण तभी दे सकती है जब डाटा के आधार पर यह तय हो कि उनका प्रतिनिधित्व कम है। प्रशासन की मजबूती के लिए उनका प्रतिनिधित्व जरूरी है। 12 वर्ष बाद पांज जजों की खंडपीठ जिसमें सीजेआई दीपक मिश्रा के अलावा, जस्टिस कुरियन जोसेफ, आर एफ नरीमन, एस के कौल और इंदु मल्होत्रा ​​शामिल हैं, इसकी सुनवाई कर रहे हैं।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बहस करते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण मिलना सही है या गलत, मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता। लेकिन मैं यह बात जरूर कहूंगा कि  एससी-एसटी 1000 सालों से हाशिए पर पर हैं। आज भी उनके उपर अत्याचार हो रहे हैं। हम यह कैसे तय करेंगे कि उनका प्रतिनिधित्व कम है? क्या ये हर पद के आधार पर होगा या पूरे विभाग के हिसाब से? या पूरे विभाग को मानक माना जाएगा। सरकार यह चाहती है कि 22.5 प्रतिशत सरकारी पदों पर प्रमोशन में भी आरक्षण का प्रावधान हो। इसी तरह से उन्हें समुचित प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दलिओं और आदिवासियों को सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण न दिया जाए तो उनकी स्थिति में सुधार के सभी उपाया भ्रामक होंगे। आज भी एससी-एसटी तबके को प्रताड़ित किया जा रहा है। वे पहले से ही पिछड़े हैं, ऐसे में अलग से किसी तरह की डेटा देने की जरूरत नहीं है।

बता ंदें कि केंद्र सरकार दलित समुदाय की नाराजगी देखते हुए एससी-एसटी एक्ट को भी पुराने स्वरूप में लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें प्राथमिकी दर्ज होते ही तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिनों पहले एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करते हुए इसमें गिरफ्तारी के तत्काल प्रावधान को हटा दिया था। जांच के बाद गिरफ्तारी के नियम को लागू किया था। लेकिन अब मोदी सरकार इसी माॅनसून सत्र में एससी-एसटी एक्ट को पुराने स्वरूप में वापस लाने के लिए संशाेधन विधेयक पास कर सकती है।