नरेंद्र मोदी सरकार गंगा को साफ रखने के लिए घाटों पर सुरक्षाबलों की तैनाती करने जा रही है। सरकार ने इसका ड्राफ्ट रूल्स भी तैयार कर लिया है। प्रस्ताव के मुताबिक सरकार गंदगी फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाएगी। इसके अलावा गंदगी फैलाने वालों को जेल तक भेजा जा सकता है। द प्रिंट में छपी एक खबर के मुताबिक घाटों पर सुरक्षाबलों की तैनाती होगी। सरकार हिंदुओं द्वारा पवित्र मानी जाने वाली इस नदी की रक्षा के लिए दो निकायों की स्थापना करेगी।
जीपीसी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने जा रही जीपीसी नए मसौदा कानून – राष्ट्रीय नदी गंगा (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) विधेयक, 2019 का ही हिस्सा है। मोदी सरकार इस बिल को शीतकालीन सत्र में संसद में पास करवा सकती है। इस बिल में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की भी बात कही गई है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द प्रिंट को बताया कि ड्राफ्ट रूल्स को 2017 से तैयार किया जा रहा था और जिसे सुझाव के लिए संबंधित मंत्रालयों के पास भेजा गया है। इसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।
बता दें कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने गंगा नदी की सफाई के लिए एक विशेष विभाग गठित किया था। यह विभाग जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। इसके तहत गंगा नदी को साफ करने के लिए 2015 में ‘नाममि गंगे’ प्रोजेक्ट शुरू किया गया। गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए यह नरेंद्र मोदी सरकार का महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।
इस प्रोजेक्ट के लिए 20,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। लेकिन इस प्रोजेक्ट की जमीनी स्तर पर कोई खास प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा। नदी में अभी भी कई जगह गंदगी फैली रहती है। इस परेशानी को समझते हुए केंद्र सरकार सुरक्षाबलों की तैनाती, जुर्माना और दंड लगाकर नदी को साफ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है।

