देश की उच्च शिक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण संस्था भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआइ) का गठन अधर में लटक गया है। केंद्र की ओर से उच्च शिक्षा के अलग-अलग विनियामकों की बजाय एक ही निमायक यानी एचईसीआइ की स्थापना के लिए संसद में विधेयक प्रस्तावित था लेकिन सत्रहवीं लोकसभा के अंतिम सत्र में भी यह विधेयक पेश नहीं किया गया। अब इस कार्य को अगली सरकार के गठन के बाद ही पूरा किया जा सकेगा। देश में जल्द ही आम चुनाव होने वाले हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रावधानों के अनुरूप विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। देश में उच्च शिक्षा के अंतर्गत गैर-तकनीकी, तकनीकी और अध्यापक शिक्षा के लिए अलग-अलग नियामक करते हैं। गैर तकनीकी शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), तकनीकी शिक्षा के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) और अध्यापक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) मौजूद है।

देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय और इन सभी संबद्ध कालेज और अन्य उच्च शिक्षा संस्थान यूजीसी के नियमों के अनुसार संचालित होते हैं। तकनीकी शिक्षा के लिए सभी संस्थानों को मान्यता देने से लेकर पाठ्यक्रम निर्धारण, प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यचर्या, परीक्षा आदि से संबंधित मानक और नियम एआइसीटीई द्वारा बनाए जाते हैं।

वहीं, अध्यापक शिक्षा यानी बीएड, डीएलएड, बीपीएड, एमएड, बीईएलएड आदि प्रदान करने वाले संस्थानों के नियमन का काम एनसीटीई द्वारा किया जाता है। इस व्यवस्था बदलाव प्रस्तावित है। इसके तहत अलग-अलग विनियामकों के स्थान पर एक नियामक बनाने का प्रस्ताव है, जिसका नाम भारतीय उच्च शिक्षा आयोग है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले साल अक्तूबर में एक साक्षात्कार में कहा था कि भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के गठन से संबंधित विधेयक को जल्द ही सरकार संसद में पेश करेगी लेकिन इस विधेयक को संसद में पेश ही नहीं किया गया। भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम को निरस्त करना) विधेयक, 2018 का एक मसविदा, जो यूजीसी अधिनियम को निरस्त करने और भारत के उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का प्रावधान करता है, को आम लोगों की प्रतिक्रिया और परामर्श के लिए 2018 में लोगों के सामने रखा गया था। 2021 में शिक्षा मंत्री के रूप में सत्ता संभालने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने एचईसीआइ विधेयक को लागू करने के लिए नए सिरे से प्रयास किए।

आयोग के तीन प्रमुख कार्यक्षेत्र

पहला, नियामक की भूमिका है। अभी यह कार्य यूजीसी, एआइसीटीई और एनसीटीई करते हैं। यूजीसी ने भारतीय उच्च शिक्षा आयोग से संबंधित कई आंतरिक सुधार अपने स्तर पर पहले ही शुरू कर दिए हैं। दूसरा, दो स्तरों पर मान्यता है। कालेजों की मान्यता और पाठ्यक्रमों की मान्यता। तीसरा, क्या पढ़ाया जाएगा और कैसे पढ़ाया जाएगा, इसके बारे में पेशेवर मानक तय करना है। फंडिंग का काम नए आयोग के पास नहीं होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, कृषि मंत्रालय जैसे प्रशासनिक मंत्रालय के पास फंडिंग से संबंधित अधिकार रहेगा।

चिकित्सा और विधि पाठ्यक्रमों की पढ़ाई आयोग के दायरे में नहीं

नए गठित किए जाने वाले भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के कार्यक्षेत्र दायरे से चिकित्सा शिक्षा और विधि शिक्षा व्यवस्था को बाहर रखा जाएगा। ऐसे में चिकित्सा शिक्षा से संबंधित संस्थानों को विनियमित करने का काम भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) व अन्य नियामकों द्वारा पहले की ही किया जाता रहेगा। इसी प्रकार, विधि शिक्षा के संस्थानों का भारतीय बार परिषद (बीसीआइ) द्वारा ही पहले की तरह नियमन जारी रहेगा।