अकाल का सामना कर रहे महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में मंगलवार को जो बरसात शुरू हुई, वह प्राकृतिक थी या कृत्रिम, इस पर बहस छिड़ी हुई है। मगर इस बहस से परे मराठवाड़ा के किसान खुश हैं क्योंकि इस बरसात ने उनकी मुरझा रही उम्मीदों को फिर से हराभरा बना दिया है। सूबे में कहीं रिमझिम और कहीं मूसलाधार बरसात के चलते दोबारा बोनी की संभावनाएं क्षीण हुई है। मराठवाड़ा और विदर्भ में मानसून विभाग ने बुधवार को मूसलाधार बरसात की संभावना जताई है। दूसरी ओर राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे का कहना है कि मंगलवार को कृत्रिम बरसात का जो प्रयोग किया गया, उसकासकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
मंगलवार को लगभग डेढ़ महीने बाद सूबे पर इंद्र देवता मेहरबान हुए और कई जगह झमाझम बरसात हुई। विदर्भ में तो मूसलाधार बरसात हुई जबकि मराठवाड़ा में मानसून फिर से लौटा। इससे अकाल के अंदेशे से परेशान किसानों के चेहरे चमक उठे। जलगांव और नाशिक इलाके में जोरदार बरसात हुई। अकोला की पूर्णा नदीं में तो बाढ़ आ गई और एक आदमी भी उसमें बह गया। मराठवाड़ा के उस्मानाबाद को छोड़कर बाकी जिलों में मानसून फिर से सक्रिय हो गया।
औरंगाबाद जिले में मंगलवार को वोट (587 ग्राम पंचायतों के चुनाव) और बौछारें दोनों साथ पड़े। इस बरसात से कपास और सोयाबीन की फसलों को काफी फायदा मिलेगा। मंगलवार की रात औरंगाबाद में जोरदार बरसात हुई। मंगलवार को अमरावती, भंडारा, चंद्रपुर, यवतमाल,, वर्धा, गोंदिया, गडचिरोली में उल्लेखनीय और कोकण समेत खानदेश के जलगांव और धुले में भी जोरदार बरसात हुई। मानसून विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों में मराठवाड़ा, कोकण, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में मूसलाधार बरसात हो सकती है।
बरसात नहीं होने से मराठवाड़ा के लातूर, बीड़ और उस्मानाबाद जिलों में अकाल जैसी स्थिति खड़ी हो गई है। लोगों के सामने पीने के पानी और जानवरों के सामने चारे का संकट है। उस्मानाबाद में किसानों की हालत बहुत खराब है और वहां सरकार पीने का पानी टैंकरों से भेज रही है। बीड़ में पशुओं के चारे का संकट है। लातूर में लगातार चौथे साल बरसात नहीं हुई, जिससे हालात बहुत बिगड़ गए हैं।
मंगलवार को बीड़, शेगांव तथा अहमदनगर में कृत्रिम बरसात का प्रयोग किया गया। बादलों में रसायन का छिड़काव किया गया था और अधिकारियों के मुताबिक उसके नतीजे बुधवार की दोपहर तक पता चलने थे। बीड में मंगलवार की रात से रिमझिम बरसात शुरू हो गई थी। बुधवार को यही प्रयोग लातूर में किया गया। बीड़, उस्मानाबाद और लातूर में बादलों के बीच हवाई जहाज से रसायन छिड़कने के प्रयोग को सरकार प्रमुखता दे रही है क्योंकि यहां सूखे का प्रभाव बहुत ज्यादा है। खड़से ने कृत्रिम बरसात के प्रयोग के बाद मंगलवार को बीड़, शेगांव और अहमदनगर इलाकों में हुई 14 से 17 मिमी. बरसात को संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को जिन जगहों पर कृत्रिम बरसात के प्रयोग के बाद बरसात हुई, वहां पहले से बरसात नहीं हुई थी।