दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर शनिवार सुबह एक किसान का शव बरामद होने से हड़कंप मच गया। पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए मार्चरी में रखा गया है। पुलिस का कहना है कि हरियाणा के जींद जिले के सिंघवाल गांव में रहने वाले कर्मवीर का शव आंदोलन स्थल के पास एक पेड़ से लटका मिला। परिजनों से मंजूरी मिलने के बाद ही कर्मवीर के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

कर्मवीर के पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखा है, भारतीय किसान यूनियन जिंदाबाद, मेरे किसान भाईयों ये मोदी सरकार हमें तारीख पर तारीख देती जा रही है। ये नहीं कहा जा सकता कि ये काले कानून कब वापस होंगे। हम उस, समय तक अपने घर नहीं जाएंगे जब तक ये काले कानून वापस नहीं होते।

हालांकि दिल्ली सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों के बीच सुसाइड का यह पहला मामला नहीं है। पिछले माह रोहतक के किसान ने आत्महत्या कर ली थी, जबकि उससे पहले पंजाब के जलालाबाद के वकील ने जहर खाकर जान दे दी थी। किसान दो माह से ज्यादा समय से सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मवीर के साथियों ने बताया कि पिछली रात वो बहुत निराश था और निराशा भरी बातें भी कर रहा था।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन पहले से ज्यादा तेज हुआ है। शनिवार को किसानों ने सारे देश में तीन घंटे के लिए चक्का जाम भी किया था। दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं किया गया। किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक काले कानून वापस नहीं हो जाते तब तक किसान घर नहीं जाएंगे। उनका कहना था कि आंदोलन को अक्टूबर तक चलाएंगे। उसके बाद नई रणनीति तय की जाएगी। उनका कहना है कि किसान आंदोलन को नए तेवर देने के लिए अब रणनीति लगातार बदली जाएगी।

टिकैत का कहना था कि सरकार जिस तरह से बर्ताव कर रही है, वह किसानों के लिए ठीक नहीं है। वह वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रैशर में बात नहीं करेंगे। किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर है। उनका कहना था कि जिस तरह से सरकार ने 11 दौर की वार्ता की थी, उसमें लगता नहीं था कि सरकार के प्रतिनिधि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं।