फैज अहमद फैज की मशहूर नज्म “हम देखेंगे” देश भर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में गायी जा रही है। बता दें कि पाकिस्तानी कवि द्वारा 1979 में लिखी यह नज्म लगभग सभी सीएए विरोधी स्थानों पर गायी गई। यह सिलसिला संसद द्वारा सीएए पारित होने के बाद से चल रहा है। इसके अलावा रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता “वेयर द माइंड इज विदाउट फियर ” भी एंटी सीएए नारों में शामिल है।
फैज़ और टैगोर की कविता का बनाया कॉम्बो: बता दें कि सूफी गायक और संगीतकार सोनम कालरा ने फैज की नज्म “हम देखेंगे” को गाया है और इसके साथ टैगोर की कविता “वेयर द माइंड इज विदाउट फियर ” को सुनील मेहरा ने मिश्रित किया है। इसके वीडियो में कालरा फैज़ और टैगोर की दुनिया का कॉम्बो बना रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि इस वीडियो को बनाने के पीछे का मकसद स्वतंत्रता और शांति के संदेश को आगे बढ़ाते रहना है।
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देश के बाहर भी लोग पसंद कर रहे यह वीडियो: इस वीडियो में मनीष सहारिया की मधुर संगीत और इन्नी सिंह की सिनेमैटोग्राफी के साथ कालरा ने तीन अन्य कलाकारों के साथ मिलकर दो महान कवियों की नज्म को बेहतरीन तरीके से पेश किया है। इस वीडियो को भारत के अलावा सीमा पार के लोग भी पसंद कर रहे हैं।
Over the past 10 days have heard 6 different renditions of #HumDekhenge. The power of poetry! Who would have thought one day #Faiz would become the protest anthem in India.That 73 years after a land was partitioned, Faiz would bind and stir emotions.https://t.co/kuMsrWhTHp
— bs بریندا (@brinda_suri) January 23, 2020
Tonic for your soul! https://t.co/FEE17Xgy1J
— prateeq (@prateeqkumar) January 22, 2020
सरकार तक आवाज पहुंचाने की कर रहे कोशिश: बता दें कि लोकसभा में 9 दिसंबर को सीएए पास होने के बाद से ही देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई शहरों में लोग हिंसक प्रदर्शन भी कर चुके हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान लोग अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए तमाम तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। इस क्रम में लोग फैज अहमद फैज का नज्म, रविद्रनाथ टैगोंर की कविताएं, पोस्टर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

