मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ की गुंजाइश से इनकार करते हुए कहा है कि मतदान के लिए मतपत्र की ओर लौटने की अब कोई गुंजाइश नहीं है। अरोड़ा ने बुधवार को एक सम्मेलन में कहा कि जिस प्रकार से किसी कार या पेन का दुरुपयोग किया जा सकता है उसी तरह ईवीएम का भी दुरुपयोग किया जाना तो संभव है लेकिन इसमें छेड़छाड़ कर कोई गड़बड़ी नहीं की जा सकती है।

अरोड़ा ने कहा कि ईवीएम का इस्तेमाल पिछले 20 सालों से किया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य अदालतें ईवीएम को मतदान के लिए सही ठहरा चुकी हैं। ऐसे में ईवीएम के बजाय मतपत्र की ओर लौटने का सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि आयोग चुनाव सुधारों, खासकर चुनाव आचार संहिता के पालन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

सम्मेलन में लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में अरोड़ा ने कहा कि इस बारे में राजनीतिक दलों की सहमति से सरकार को फैसला करना है। फैसले को आयोग लागू कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग किसी स्थान के मतदाता को किसी अन्य स्थान से मतदान करने की सुविधा को भी मुहैया कराए जाने की परियोजना पर काम कर रहा है।

अरोड़ा ने उदाहरण देकर बताया कि इस व्यवस्था के तहत अगर राजस्थान का कोई मतदाता चेन्नई में कार्यरत है तो वह राजस्थान में चुनाव होने पर चेन्नई से ही मतदान कर सकेगा। इस परियोजना पर आयोग के विशेषज्ञ आइआइटी मद्रास के साथ मिल कर काम कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं होगा कि लोग घर बैठे ही मतदान कर सकेंगे, बल्कि दूरस्थ मतदान के लिए मतदाता को मतदान केंद्र पर जाना होगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए मौजूदा कानून में बदलाव की जरूरत होगी।