भारत और रूस के बीच पिछले सप्ताह हुए रक्षा करार में नियमों को तोड़ने-मरोड़ने के आरोप लग रहे हैं। अत्यधिक कम दूरी की वायु रक्षा (VSHORAD) प्रणाली के लिए रूस की सरकारी कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट की बोली को सबसे कम बताते हुए विजेता घोषित किया गया था। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे के अन्य प्रतियोगियों ने घोषणा के बाद अपना विरोध दर्ज कराते हुए रूस की तरफदारी किए जाने के लिए नियमों को ताक पर रखे जाने का आरोप लगाया है। इस सौदे के लिए रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के अलावा फ्रांस की MBDA और स्वीडन की SAAB ने दावेदारी की थी। अखबार ने एक आधिकारिक सूत्र के हवाले से कहा है, ”तीनों प्रतियोगियों में से रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के Igla-S को चुने जाने के बाद MBDA और SAAB ने विरोध दर्ज कराया है।”
अखबार ने सूत्र के हवाले से लिखा है कि SAAB ने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए चौथा पत्र लिखा है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि कैसे नियमों से हटकर प्रक्रिया पूरी की गई। सौदेबाजी के दौरान कई मौकों पर MBDA ने भी ऐसी ही आपत्तियां दर्ज कराई हैं। जो मुद्दे उठाए गए हैं, उनमें निर्दिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति न किए जाने तथा एक विशेष वेंडर का हित करने के लिए अनुपालन आवश्यकताओं में बदलाव प्रमुख हैं।
सभी प्रतियोगियों की मौजूदगी में फील्ड ट्रायल्स कराए गए थे। 2014 में ट्रायल्स के दौरान, छह मिसाइलें दागी जानी थीं जिसमें से कम से कम चार का लक्ष्य भेदना जरूरी था। आरोप है कि Igla-S का निशाना सिर्फ एक बार लगा जबकि अन्य ने कम से कम चार लक्ष्य भेदे। 2016 में री-ट्रायल्स के दौरान यह नियम बदल कर लक्ष्य को केवल ट्रैक करके लॉक करना तय कर दिया गया। एक और आरोप यह भी है कि Igla-S का निर्माण अब नहीं हो रहा है क्योंकि रूस ने इसकी जगह अगली पीढ़ी के वैरियंट 9K333 Verba को देनी शुरू कर दी है।
द हिंदू ने गोपनीयता की शर्त पर रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि सौदे में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। अखबार ने कहा कि जब उसने सेना और कंपनियों से संपर्क की कोशिश की तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
भारत और रूस ने भारतीय नौसेना के लिए गोवा में दो मिसाइल युद्धपोतों के निर्माण के लिहाज से 50 लाख डॉलर का सौदा भी किया। बीते 20 नवंबर को रक्षा क्षेत्र की पीएसयू गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) और रूस की सरकारी रक्षा निर्माता रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के बीच तलवार श्रेणी के दो युद्धपोतों के निर्माण के लिए करार किया गया। यह समझौता रक्षा सहयोग के लिए सरकार से सरकार के बीच रूपरेखा के तहत किया गया।

