राजधानी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच भड़की हिंसा के चलते अबतक कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई है।वहीं 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राजधानी दिल्ली में हिंसा अब शांत होती नजर आ रही है लेकिन हिंसा के दौरान हुई घटनाओं से कई खौफनाक मंजर सामने आए हैं। ऐसी ही एक कहानी नितिन की है। उन्होंने द क्विंट के साथ आपबीती साझा की है।
ब्रह्मपुरी के रहने वाले नितिन के सिर में 40 टांके लगे हैं। वह बताते हैं 24 फरवरी की रात ब्रह्मपुरी के गली न.1 में यह घटना घटी। नितिन उर्फ मोनू के मुताबिक वह अपने बेटे के लिए दवाई लेने जा रहे थे इस दौरान उनके पिता ने भी साथ चलने को कहा जैसे ही ये लोग गली न.1 क्रो क्रास किया,सामने से भीड़ ने हमला किया और उसके बाद नितिन और उनके पिता के साथ उन लोगों ने मारपीट की।
नितिन बताते हैं कि ”हमले के बाद भीड़ में शामिल लोग यह देखने आए कि हम जिंदा हैं या मर चुके हैं। हमले के बाद मैं हिला नहीं जिसके बाद वो लोग मुझे छोड़कर मेरे पिता को मारने लगे। उन्हें इसका एहसास था कि अब शायद ही मेरे पिता उठ पाएं।”
द क्विंट की खबर के मुताबिक नितिन के पिता विनोद को बाइक से उतार लिया गया और उसके बाद बाइक को आग लगा दी गई। आस-पास लोग अल्लाह हू अकबर का नारा लगा रहे थे।
उनके चले जाने के बाद मैं उठा , लेकिन वे आसपास थे। जब कुछ लोगों ने पथराव करना बंद कर दिया था, तब 15 अन्य मुसलमानों ने पथराव करना जारी रखा। मैं उनसे अपने पिता को छोड़ने के लिए चिल्लाता रहा लेकिन उन लोगोें ने एक ना सुनी। वह लोग अल्लाह हू अकबर चिल्लाते रहे।
नितिन के मुताबिक उसके पिता को आग और भीड़ से दूर खींचने में मदद की। मैं अपने पिता को डॉक्टर के पास ले जाने के लिए सभी से मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई आगे नहीं आया। फिर कहीं से एक आदमी बाइक पर आया और मुझे बाइक पर बैठने के लिए कहा। वह हिंदू था। नितिन अपने पिता को पास के ही जग प्रकाश अस्पताल ले गए। जहां उनके पिता का सीटी स्कैन किया गया। सीटी स्कैन करने पर पता चला कि उनके पिता की मौत हो चुकी है।

