पिछले साल राजधानी दिल्ली में रेड फोर्ट के पास हुए धमाके में कई लोगों की मौत हुई थी। इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी दौरान अल फलाह यूनिवर्सिटी भी विवादों में घिर गई। जांच एजेंसियों ने इस यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टरों को दिल्ली धमाके के मामले में संदिग्ध के रूप में देखा था।
अब सामने आया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने एमबीबीएस और पीजी कोर्सेज के लिए गलत तरीकों से सर्टिफिकेट बनवाए थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने कई डॉक्टरों को रेगुलर फैकल्टी के तौर पर दिखाया, ताकि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को गुमराह किया जा सके। इंसपेक्शन से ठीक पहले जल्दबाजी में कई क्लिनिक भी सेट अप कर दिए गए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से यह दावे किए गए हैं क्योंकि फिलहाल एजेंसी अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की जांच कर रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को ED ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जावेद अहमद सिद्दीकी और ट्रस्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया। बताया गया कि जांच एजेंसी ने 139.97 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की है। इससे पहले, 18 नवंबर को सिद्दीकी को कई आरोपों में गिरफ्तार किया जा चुका है।
ED का दावा है कि कई डॉक्टरों को गुमराह करने के लिए उन्हें रेगुलर फैकल्टी के रूप में दिखाया गया। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप से जुड़ी 9 फर्जी कंपनियां भी बनाई गई थीं।
यह भी आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी ने अपने NAAC एक्रिडिटेशन को लेकर गलत जानकारी साझा की और UGC की धारा 12-B के तहत मान्यता प्राप्त होने का झूठा दावा किया। कोर्ट में ED की ओर से पेश वकील साइमन बेंजामिन ने जोर देकर कहा कि यूनिवर्सिटी ने न केवल नियमों का गंभीर उल्लंघन किया, बल्कि उन छात्रों की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ किया, जिन्होंने इसकी झूठी बातों पर आंख बंद कर भरोसा कर लिया।
डॉक्टरों की नियुक्ति में भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पता चला कि कुछ डॉक्टरों को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया था। लेकिन NMC के सामने इन्हीं डॉक्टरों को रेगुलर फैकल्टी बताकर वेतन दर्शाया गया। ED का सबसे बड़ा आरोप है कि इसी फर्जी प्रक्रिया के जरिए अल फलाह यूनिवर्सिटी ट्रस्ट ने करीब 493.24 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
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