गोवा में पिछले एक महीने से ड्रग्स के खिलाफ एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसे समाज के लिए खतरा बताया गया और इस अभियान का टॉपिक ‘ड्रग्स: समाज के लिए खतरा’ था। इसके समापन समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत भी शामिल हुए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि गोवा संरक्षण, विरासत और अपनी पहचान पर गर्व का प्रतीक है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “जब मैं गोवा की खूबसूरत गलियों से गुज़रते हुए इस जगह पर आया, जहां हर दिन हज़ारों पर्यटक और परिवार आते हैं, तो यह मेरे लिए गोवा की भावना को देखने के लिए काफी था, जो न केवल इमारतों और सड़कों के कोनों में, बल्कि गोवा के हर नागरिक और निवासी में बसी हुई है। ये सभी गोवा की प्राचीनता, लचीलेपन और सुंदरता का DNA लिए हुए लगते हैं। मैंने खुद से सोचा संरक्षण, विरासत और हमारी पहचान पर गर्व ही गोवा इसी का प्रतीक है।”
नशीली दवाओं का दुरुपयोग समाज में घुलता है- CJI
CJI ने कहा कि ये एक ऐसा अभियान है, जो नागरिकों को जागरूक, सूचित और एक ऐसे खामोश दुश्मन का सामना करने में सक्षम बनाकर उन्हें मज़बूत करता है जो धीरे-धीरे हमारे जीवन में घुस गया है। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग शोर या चेतावनी के साथ नहीं आता, यह चुपचाप घरों, क्लासरूम और समुदायों में घुस जाता है। यह हमारी क्षमता को खत्म करता है और भविष्य को बिगाड़ता है।
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चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह पहल सिर्फ एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक संकल्प का एक दावा है। उन्होंने कहा, “मेरे लिए किसी अभियान की सफलता उसकी महत्वाकांक्षा में नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन में होती है। पिछले महीने हमने जो देखा है, वह प्रेरणा से कम नहीं है। अपने छोटे से समय में इस अभियान ने गोवा के हर कोने तक पहुंच बनाई है। शहरों से लेकर दूरदराज के आदिवासी गांवों तक, छात्र हॉस्टल से लेकर पंचायत हॉल तक, कोचिंग संस्थानों से लेकर मछली पकड़ने वाले समुदायों तक ये अभियान पहुंचा है।”
दया के बिना कानून अत्याचार बन जाता है- सीजेआई
सीजेआई ने कहा कि पिछले चार दशकों में मैंने हमारी न्याय प्रणाली के विकास को देखा है। उन्होंने कहा, “मैंने देखा है कि न्याय प्रणाली ने यह पहचाना है कि दया के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना दया अराजकता बन जाती है। इस अभियान ने उल्लेखनीय निरंतरता के साथ इस बीच का रास्ता अपनाया है। इसने छात्रों से बिना उन्हें नीचा दिखाए बात की है। इसने परिवारों को उनके संघर्षों का सम्मान करते हुए जोड़ा है। इसने लोगों के मन में डर पैदा किए बिना उन्हें संवेदनशील बनाया है। इसने उन लोगों को आवाज़ दी है जिन्हें समाज ने नजरअंदाज कर दिया था क्योंकि इस स्तर पर उनकी गवाही किसी भी पैम्फलेट से ज़्यादा शक्तिशाली है।” पढ़ें सीएम योगी की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश का उदाहरण देने की बात क्यों करने लगे CJI सूर्यकांत?
