जस्टिस रंजन गोगोई देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद सक्रिय हो गए हैं। बतौर CJI पहले दिन ही जस्टिस रंजन गोगोई ने मामलों की लिस्टिंग और सुनवाई को लेकर अपने सख्त तेवर दिखाए। दरअसल, बीजेपी नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने चुनावी खर्चों से जुड़े मौजूदा कानून में खामियों, चुनाव से जुड़ी याचिकाओं के लंबे समय से लंबित होने और इसके कारण निष्पक्ष चुनाव पर पड़ने वाले असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ में इस मामले की लिस्टिंग हुई थी। अर्जी पर सुनवाई शुरू होते ही CJI ने पूछा कि इस मामले में याची कौन है? इस पर अश्विनी उपाध्याय अधिवक्ता के गाउन (रोब) पहने अपने स्थान पर खड़े हो गए। CJI ने उनसे पूछा कि आप इस मामले में वकील हैं? सुप्रीम कोर्ट के वकील ने बताया कि वह सहयोग कर रहे हैं।
CJI ने तेवर सख्त करते हुए कहा, ‘तो आप वकील और याची हैं। साथ ही (वकील के) गाउन में भी हैं। कहां है शिष्टाचार? आपकी याचिका को सिर्फ इसी आधार पर खारिज कर देना चाहिए।’ इसके बाद अश्विनी उपाध्याय ने अपनी अर्जी वापस लेनी की गुजारिश की। CJI की पीठ ने फौरन अश्विनी उपाध्याय को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। इससे पहले कोर्ट रूम में दाखिल होते ही CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि सिर्फ अर्जेंट याचिका को ही सुनवाई के लिए शामिल किया जा सकता है। इसके बाद CJI के कोर्ट में मौजूद लोग धीरे-धीरे जाने लगे।

त्वरित सुनवाई के लिए तय होंगे मानक: CJI रंजन गोगोई ने बुधवार (3 अक्टूबर) को पद संभालने के बाद अविलंब सुनवाई योग्य मामलों के लिए मानक तैयार करने की बात कही। उन्होंने बताया कि जरूरी मुकदमों की त्वरित सुनवाई के लिए नए मानक तय किए जाएंगे, तब तक त्वरित सुनवाई की इजाजत नहीं दी जाएगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जस्टिस रंजन गोगोई को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ दिलाई। जस्टिस रंजन गोगोई ने मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस दीपक मिश्रा का स्थान लिया है। जस्टिस मिश्रा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जस्टिस गोगोई अगले साल 17 नवंबर तक मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहेंगे। इस तरह बतौर CJI उनका कार्यकाल तकरीबन 13 महीने का होगा। बता दें कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों में जस्टिस रंजन गोगोई भी एक थे। जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

