भारतीय सेना और इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस ने केन्द्र सरकार को जानकारी देते हुए बताया है कि इस साल चीन की सेना ने पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके देपसेंग सेक्टर और बाराहोती मैदानी इलाके में 5 बार घुसपैठ की है। सेना के अनुसार, यह घुसपैठ हवाई क्षेत्र में की गई है। बताया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के हेलिकॉप्टरों ने भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया। सेना के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि इस दौरान चीनी सेना के हेलिकॉप्टर लाइन ऑफ कंट्रोल के 5 किलोमीटर अंदर तक आ गए थे। बता दें कि देपसेंग सेक्टर में साल 2013 में भारतीय और चीनी सेना 21 दिनों तक आमने-सामने रही थी। उसी देपसेंग सेक्टर में चीनी सेना ने 3 बार और बाराहोती मैदानी इलाके में कुल 2 बार घुसपैठ की।
सेना ने जो रिपोर्ट सरकार को भेजी है, उसके अनुसार, इस साल चीनी सेना द्वारा कुल 45 बार अतिक्रमण की कोशिश की गई, जिनमें 5 बार घुसपैठ की घटनाएं भी शामिल हैं। चीनी सेना के हेलिकॉप्टर 8 और 10 मार्च को बाराहोती मैदान के हवाई क्षेत्र में घुसे। उससे पहले 27 फरवरी को दो चीनी हेलिकॉप्टर देपसेंग सेक्टर के हवाई इलाके में दाखिल हो गए थे और इस दौरान 10-10 मिनट तक भारतीय हवाई क्षेत्र में उड़ान भरते रहे।
सेना के एक वरिष्ठ कमांडर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पश्चिमी सेक्टर के मानचित्रों का अभी तक भारत और चीन के बीच आदान-प्रदान नहीं किया गया है, लेकिन मध्य सेक्टर के मानचित्रों का भारत और चीन के बीच आदान-प्रदान हो चुका है। ऐसे में, बाराहोती मैदानी इलाके के हवाई क्षेत्र में चीन की घुसपैठ भारत के लिए चिंता का विषय है। माना जा रहा है कि चीन इस इलाके में अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि भारतीय सेना और आईटीबीपी द्वारा एलएसी पर पैट्रोलिंग करने के कारण चीन शायद ऐसा कर रहा है। उल्लेखनीय है कि भारत के चीन में राजदूत गौतम बंबावले ने पिछले हफ्ते हांगकांग के एक न्यूजपेपर को बताया था कि 3448 किलोमीटर लंबी एलएसी में किसी भी एकतरफा परिवर्तन का भारत विरोध करेगा। इससे पहले डोकलाम में भी भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने आ चुकी हैं।

