Chandrayaan-3 Landing : भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO के चंद्र मिशन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करके इतिहास रच दिया है। ISRO ने अपने दूसरे प्रयास में यह सफलता पाई है। चंद्रयान-2 मिशन हार्ड लैंडिंग की वजह से सफल नहीं हो पाया था। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब हम ऐसे ऐतिहासिक क्षण देखते हैं तो हमें बहुत गर्व होता है। ये नए भारत का सूर्योदय है। हमने धरती पर संकल्प किया और चांद पर उसे साकार किया…भारत अब चंद्रमा पर है। चंद्रयान-3 की सफलता पर दुनिया भर से भारत को बधाई संदेश मिल रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी चंद्रमा के साउथ पोल पर चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग के लिए भारत को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “इस अभियान में शामिल सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए यह एक अविश्वसनीय उपलब्धि है। हमें इस मिशन और अंतरिक्ष अन्वेषण में आपके साथ अधिक व्यापक साझेदारी पर गर्व है।”
चंद्रयान-3 चांद की सतह पर उतर चुका है। मिशन के पल-पल के अपडेट्स के लिए पढ़ें Jansatta.Com।
Chandrayaan-3 Landing Live: पाकिस्तान के लोगों की नजरें भारत के चंद्रयान-3 मिशन पर हैं। पाकिस्तान लोगों ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि भारत पाकिस्तान से बहुत आगे है। भारत चांद पर ही नहीं मंगल पर भी अपना स्पेसक्रॉफ्ट लैंड करवा सकता है।
VIDEO | "Not just on the Moon, India's spacecraft can land on the Mars also."
— Press Trust of India (@PTI_News) August 23, 2023
Locals in Islamabad, Pakistan reacts on ISRO's Chandrayaan-3 mission.#Chandrayaan3Landing #Chandrayaan3 #Chandrayaan_3 pic.twitter.com/xoqddRpAU7
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित हजरतबल दरगाह में चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग के लिए विशेष नमाज पढ़ी गई।
#WATCH | J&K | People offer special prayers at Hazratbal Dargah in Srinagar for the successful lunar landing of Chandrayaan-3. pic.twitter.com/eX6RqPDl4A
— ANI (@ANI) August 23, 2023
चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले अभिनेता रितेश देशमुख, उनकी पत्नी जेनेलिया डिसूजा ने कहा कि हमें अपने देश का समर्थन करने वाले भारतीयों पर गर्व है।
#WATCH | Few hours ahead of Chandrayaan-3 landing on the Moon, Genelia and Riteish Deshmukh say, "We are proud Indians supporting our country." pic.twitter.com/wAiUY8k0gp
— ANI (@ANI) August 23, 2023
पूर्व नौसेना अधिकारी और जहाज से अकेले पूरी दुनिया की यात्रा करने वाले केरल के नाविक एवं कमांडर अभिलाष टॉमी भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान ‘गगनयान’ के संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद करेंगे। टॉमी एकल नौकायान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित ‘गोल्डन ग्लोब रेस 2022’ में दूसरे स्थान पर रहे थे। टॉमी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह ‘गगनयान’ के संबंध में अंतरिक्ष यात्रा पर इसरो के साथ विचार विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा वह अपने अगले नौकायान प्रयास को लेकर भारतीय नौसेना के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैं अपने अगले नौकायान प्रयास को लेकर नौसेना के साथ काम करूंगा। इसके अलावा मैं भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान में इसरो की मदद करूंगा।’’
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चंद्रयान -2 अपने अभियान में विफल रहा था क्योंकि इसका लैंडर ‘विक्रम’ सात सितंबर, 2019 को लैंडिंग का प्रयास करते समय लैंडर के ब्रेकिंग सिस्टम में खराबी आ जाने के कारण सतह पर उतरने से कुछ मिनट पहले चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। चंद्रयान का पहला अभियान 2008 में हुआ था।
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अमेरिका में मौजूद भारतीय समुदाय के लोग चंद्रयान-3 के बुधवार को चंद्रमा की सतह पर उतारने संबंधी भारत के महत्वाकांक्षी मिशन के सफल होने का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। भारतीय समुदाय के लोगों का कहना है कि यह मिशन भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति के तौर पर पेश करेगा, साथ ही लाखों बच्चों को विज्ञान, भौतिकी तथा अतंरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई करने को प्रेरित करेगा।
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हरियाणा के स्कूलों में छात्रों को प्रेरित करने तथा उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए बुधवार शाम को ISRO के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की लैंडिंग का सीधा प्रसारण किया जाएगा। राज्य के शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने ताया कि राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को बुधवार शाम पांच बजे से छह बजे तक स्कूल खोलने का निर्देश दिया गया है।
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ISRO ने 15 साल में तीन चंद्र अभियान भेजे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो चंद्रमा इसरो को अपने यहां बार-बार आमंत्रित करता है। और ऐसा क्यों न हो? वैज्ञानिकों को 2009 में चंद्रयान-1 से मिले डेटा का पहली बार इस्तेमाल कर चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में अंधकार वाले और सबसे अधिक ठंडे हिस्सों में बर्फ के अंश का पता चला था। चंद्रयान-1 भारत का पहला चंद्र अभियान था। इसके एक दशक बाद चंद्रयान-2 को 22 जुलाई, 2019 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया, जिसमें एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल था। देश के दूसरे चंद्र अभियान का उद्देश्य ऑर्बिटर पर पेलोड द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन और चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग तथा घूर्णन की प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करना था।
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चंद्रयान मिशन के तमिल कनेक्शन का संदर्भ इस बात से है कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े महत्वाकांक्षी चंद्र अभियानों का नेतृत्व तमिलनाडु के तीन वैज्ञानिकों ने किया है। 'भारत के मून मैन' कहलाने वाले मयिलसामी अन्नादुरई ने 2008 में पहले चंद्रयान मिशन और एम वनिता ने 2019 में चंद्रयान-2 मिशन का नेतृत्व किया था, जबकि एम वीरमुथुवेल मौजूदा चंद्रयान-3 मिशन की कमान संभाल रहे हैं। चंद्रयान-3 के 14 जुलाई को दोपहर 2.35 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने के बाद वीरमुथुवेल रॉकेट पर नजर रखने के लिए वापस बेंगलुरु के इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) चले गए। उन्होंने मीडिया से कहा कि वह चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग मॉड्यूल की सॉफ्ट-लैंडिंग सुनिश्चित करने के बाद ही उससे बात कर पाएंगे।
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चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 की अगली कड़ी है और इसका उद्देश्य चांद की सतह पर सुरक्षित और आसानी से लैंडिंग करना, चंद्रमा पर घूमना और वैज्ञानिक प्रयोग करना है। चंद्रयान -2 अपने अभियान में विफल रहा था क्योंकि इसका लैंडर ‘विक्रम’ सात सितंबर, 2019 को लैंडिंग का प्रयास करते समय लैंडर के ब्रेकिंग सिस्टम में खराबी आ जाने के कारण सतह पर उतरने से कुछ मिनट पहले चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। चंद्रयान का पहला अभियान 2008 में हुआ था। 600 करोड़ रुपये की लागत वाला चंद्रयान-3 अभियान लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) रॉकेट के जरिए 14 जुलाई को शुरू हुआ था और आज तक इसने 41 दिन का सफर तय कर लिया है।
अगर चंद्रयान-3 अभियान चंद्रमा की सतह को छूने में और चार साल में इसरो के दूसरे प्रयास में रोबोटिक लूनर रोवर को लैंड करने में सफल रहता है तो भारत चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में प्रौद्योगिकीय महारत रखने वाला अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद चौथा देश बन जाएगा।
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ISRO ने ट्वीट कर कहा कि चंद्रयान-3 ऑटोमेटिक लैंडिंग सीक्वेंस (ALS) शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लैंडर मॉड्यूल के निर्दिष्ट बिंदु (designated point) पर पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। LM करीब 17.44 बजे अपने निर्धारित पॉइंट पर पहुंचेगा। ISRO ने आगे बताया कि ALS कमांड प्राप्त होने पर, LM थ्रॉटलेबल इंजन को सक्रिय कर देगा। मिशन का संचालन कर रही टीम कमांड्स के क्रमिक निष्पादन (equential execution of commands.) की पुष्टि करती रहेगी।
Chandrayaan-3 Mission:
— ISRO (@isro) August 23, 2023
All set to initiate the Automatic Landing Sequence (ALS).
Awaiting the arrival of Lander Module (LM) at the designated point, around 17:44 Hrs. IST.
Upon receiving the ALS command, the LM activates the throttleable engines for powered descent.
The… pic.twitter.com/x59DskcKUV
ISRO ने X (ट्विटर) पर लिखा, “ऑटोमैटिक लैंडिंग सीक्वेंस (ALS) शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार। भारतीय समयानुसार लगभग 17:44 बजे निर्धारित बिंदु पर लैंडर मॉड्यूल (LM) के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।”
Chandrayaan-3 Mission:
— ISRO (@isro) August 23, 2023
All set to initiate the Automatic Landing Sequence (ALS).
Awaiting the arrival of Lander Module (LM) at the designated point, around 17:44 Hrs. IST.
Upon receiving the ALS command, the LM activates the throttleable engines for powered descent.
The… pic.twitter.com/x59DskcKUV
भारत इतिहास रचने के करीब है क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महत्वाकांक्षी तीसरे चंद्र अभियान चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) बुधवार शाम को चंद्रमा की सतह को छूने को तैयार है। ऐसा होने के बाद भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश और धरती के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन जाएगा, जो अब तक अनछुआ रहा है।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस जहां तक चंद्रयान 3 का सवाल है तो यह भारत के लिए गौरव का क्षण है। हम कहते थे कि आकाश ही सीमा है, लेकिन भारत ने साबित कर दिया है कि बाहरी अंतरिक्ष में आकाश ही वह सीमा नहीं है। हम ऐसा करने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले वैज्ञानिकों को बधाई देते हैं। यह हजारों मील की यात्रा की शुरुआत है। हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ और ऊंचे होते जाएंगे। हमारे वैज्ञानिकों ने अपना और देश का गौरव बढ़ाया है। यह हमारे लिए गौरव का क्षण है।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई है। हम सभी उस पल का इंतजार कर रहे हैं जब चंद्रयान-3 मिशन सफल होगा। इससे भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। हमारा चंद्रयान-3 चंद्रमा पर उतरने जा रहा है। पूरा देश इस महान पल का इंतजार कर रहा है। अंतरिक्ष में भारत की इस बड़ी छलांग पर पूरी दुनिया की नजरें हैं। यह सिर्फ हमारी नहीं बल्कि पूरी मानवता की उपलब्धि होगी। मैं इस मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना करता हूं और ISRO और हमारे वैज्ञानिकों को अग्रिम बधाई देता हूं। मैं पीएम नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हर पल वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित और प्रेरित किया है।
चंद्रयान-3 मिशन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मैं इसरो वैज्ञानिकों को बधाई देना चाहता हूं। भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी पूरी दुनिया को दिशा देगी। 'चंदा मामा अब हमारे पास होंगे'।
#WATCH मैं इसरो वैज्ञानिकों को बधाई देना चाहता हूं…भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी पूरी दुनिया को दिशा देगी। 'चंदा मामा अब हमारे पास होंगे'…: चंद्रयान-3 मिशन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी pic.twitter.com/ztcFkeaxD7
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 23, 2023
केंद्र सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की लैंडिंग का सीधा प्रसारण दिखाने के लिए विशेष सभाएं आयोजित करने को कहा है। उच्च शिक्षा सचिव के संजय मूर्ति ने सभी शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को लिखे एक पत्र में कहा है कि भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग एक यादगार अवसर है, जो न केवल जिज्ञासा को बढ़ावा देगा, बल्कि हमारे युवाओं के मन में अन्वेषण के लिए जुनून भी जगाएगा। इससे गर्व और एकता की गहरी भावना पैदा होगी, क्योंकि हम सामूहिक रूप से भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ताकत का जश्न मनाएंगे।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने चंद्रयान मिशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मैं अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूं और प्रार्थना करता हूं कि चंद्रयान-3 चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करे। पूरा देश इंतज़ार कर रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। मैं वैज्ञानिकों को प्रणाम करता हूं।
#WATCH मैं अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूं और प्रार्थना करता हूं कि चंद्रयान-3 चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करे। पूरा देश इंतज़ार कर रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है…मैं वैज्ञानिकों को प्रणाम करता हूं: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश… pic.twitter.com/aAIjCh9blG
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 23, 2023
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए माता वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर टपकेश्वर महादेव देहरादून द्वारा आज हरिद्वार में विशेष गंगा पूजन किया गया। चंद्रयान-3 की सफल चंद्र लैंडिंग के लिए राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह में प्रार्थना की गई।
#WATCH चंद्रयान-3 की सफल चंद्र लैंडिंग के लिए राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह में प्रार्थना की गई। pic.twitter.com/3m3iktz8V9
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 23, 2023
14 जुलाई को चंद्रयान-3 लॉन्च होने के बाद इसे चांद की सतह पर उतरने में 41 दिन का समय लगा है। चंद्रयान-3 चांद की सतह पर सीधा नहीं जा रहा है बल्कि यह पृथ्वी और चांद की कक्षाओं में चक्कर लगाता हुआ आगे बढ़ रहा है। भारत पहला देश है जिसने इस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसरो ने इस तकनीक का इस्तेमाल कर देश के करोड़ों रुपये भी बचाए हैं। इसे अगर आम भाषा में समझें तो चंद्रयान-3 जब पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा तो वह उसी के साथ पृथ्वी के चारों ओर घूमने लगा। धीरे-धीरे इसकी कक्षा बढ़ाई गई। इसमें कम ईंधन खर्च हुआ। पृथ्वी के कक्षा से बाहर निकलने के बाद इसे चांद में कक्षा में पहुंचाया गया और धीर-धीरे इसे चांद की कक्षा में नीचे लाया गया। पढ़ें पूरी खबर
पीएम नरेंद्र मोदी चंद्रयान-3 की लैंडिंग को देखने के लिए दक्षिण अफ्रीका में शुरू होने वाली ब्रिक्स समिट के बीच से ही जुड़ेंगे। बताया गया है कि पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विक्रम लैंडर की लैंडिंग देखेंगे और वैज्ञानिकों से बात भी करेंगे। इससे पहले चंद्रयान-2 की लैंडिंग देखने के लिए भी पीएम मोदी इसरो के कार्यालय पहुंचे थे।
ISRO के पूर्व निदेशक डॉ. सुरेंद्र पाल ने कहा कि मुझे ISRO के वैज्ञानिकों की तरह ही विश्वास है कि हम बहुत बेहतर करेंगे क्योंकि चंद्रयान 2 की तुलना में बहुत सारे बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सारे एल्गोरिदम बदले गए हैं, पूर्ण अंशांकन किया गया है। लैंडर में घूमने की क्षमता है। लैंडिंग क्षेत्र को 2.5 किमी से बढ़ाकर 4 किमी कर दिया गया है।
#WATCH मुझे ISRO के वैज्ञानिकों की तरह ही विश्वास है कि हम बहुत बेहतर करेंगे क्योंकि चंद्रयान 2 की तुलना में बहुत सारे बदलाव किए गए हैं… बहुत सारे एल्गोरिदम बदले गए हैं… पूर्ण अंशांकन किया गया है। लैंडर में घूमने की क्षमता है। लैंडिंग क्षेत्र को 2.5 किमी से बढ़ाकर 4 किमी कर… pic.twitter.com/Y8vvpMGeVB
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 23, 2023
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए वाराणसी में साधुओं ने हवन किया।
#WATCH उत्तर प्रदेश: चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए वाराणसी में साधुओं ने हवन किया। pic.twitter.com/VHqQ0shfEi
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 23, 2023
नागपुर में भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी नृत्यांगना पूजा हिरवाडे ने 'नमो नमो भारताम्बे' और चंद्रयान गान पर भरतनाट्यम प्रस्तुत किया।
#WATCH | Nagpur, Maharashtra | Bharatanatyam and Kuchipudi dancer Pooja Hirwade performs Bharatanatyam on 'Namō Namō Bhāratāmbē' and Chandrayaan Anthem.
— ANI (@ANI) August 23, 2023
Chandrayaan-3 is all set to successfully land on the moon today around 6.04 pm IST. pic.twitter.com/6Z40gmgbqj
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए अमेरिका के न्यू जर्सी के मोनरो में ओम श्री साईं बालाजी मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र में प्रार्थना की गयी। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए अमेरिका के वर्जीनिया के एक मंदिर में हवन किया गया।
#WATCH अमेरिका: चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए न्यू जर्सी के मोनरो में ओम श्री साईं बालाजी मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र में प्रार्थना की जा रही है। pic.twitter.com/XRAfuTWmaU
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 23, 2023
खगोलशास्त्री डॉ आर.सी. कपूर ने कहा कि दुनिया और विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियां चंद्रयान पर नजर रख रही हैं। ISRO दुनिया की सर्वश्रेष्ठ अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक है। हमें उम्मीद है कि हम सॉफ्ट लैंडिंग में सफल होंगे। इसके साथ ही इसरो चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग (सफल लैंडिंग) करने वाली चौथी एजेंसी बन जाएगी।
बेंगलुरु में ISRO का टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड सेंटर (ISTRAC) 5 बजकर 47 मिनट पर एक कमांड जारी करेगा जो अंतरिक्ष यान को नीचे उतरना शुरू करने का संकेत देगा। कक्षा में लगभग 6000 किमी/घंटा के वेग से, टचडाउन करते समय यान को शून्य के करीब धीमा करना होगा। इसे 10 किमी/घंटा की गति से भी सुरक्षित रूप से उतरने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
