सुप्रीम कोर्ट में आज (16 नवंबर) सीबीआई विवाद में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी की जांच रिपोर्ट किसी भी पक्ष को देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट सिर्फ आलोक वर्मा को दी जाएगी, जिसपर वो अगले सोमवार (19 नवंबर) की दोपहर एक बजे तक अपना जवाब कोर्ट में सौंप सकते हैं। मामले की सुनवाई सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही थी। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि उनके पास जांच रिपोर्ट की कोई कॉपी नहीं है। तभी सीजेआई गोगोई ने पूछ डाला- “आप कौन?” जब मेहता ने बताया कि वो सीवीसी की तरफ से मामले की पैरवी कर रहे हैं, तब सीजेआई बोले- “वो… यानी आप ही इस रिपोर्ट के रचनाकार हैं और आप के ही पास यह रिपोर्ट नहीं है।”

सीबीआई से विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने भी सीवीसी की जांच रिपोर्ट की प्रति पाने की कोशिश की लेकिन कोर्ट ने उन्हें भी मना कर दिया। राकेश अस्थाना की तरफ से कोर्ट में पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पेश हुए थे। उन्होंने खंडपीठ से कहा कि चूंकि राकेश अस्थाना मामले में शिकायतकर्ता हैं, इसलिए उन्हें जांच रिपोर्ट की कॉपी मिलनी चाहिए। तभी सीजेआई रंजन गोगोई बोल पड़े- “नो चांस। आपको इसकी कॉपी नहीं मिलेगी।” जब रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि अस्थाना को उस जांच रिपोर्ट पर अपनी राय रखने का अधिकार है, तब सीजेआई ने साफ इनकार कर दिया और कहा, “नहीं।”

सुप्रीम कोर्ट कवर करने वाले पत्रकार उत्कर्ष आनंद ने कोर्ट की हलचल से बारे में ट्वीट कर जानकारी साझा की है। बतौर आनंद कोर्टरूम में एक और वाकया सामने आया जब एके बस्सी (राकेश अस्थाना मामले की जांच करने वाले अधिकारी जिनका ट्रांसफर कर दिया गया) के वकील ने अपने मुवक्किल के ट्रांसफर पर सवाल उठाए तो सीजेआई ने पूछा- “आपका ट्रांसफर कहां हुआ है?” बस्सी के वकील ने कहा- पोर्ट ब्लेयर। तब सीजेआई ने कहा- “बहुत अच्छी जगह है, रहिए, वहां कुछ दिन रहिए।” बता दें कि इसी हफ्ते सीवीसी ने आलोक वर्मा के खिलाफ अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है। अस्थाना ने आरोप लगाया था कि आलोक वर्मा ने मोइन कुरैशी से मामले को दबाने के लिए पैसे लिए हैं।