सात राज्यों की चार लोकसभा और आठ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव से भाजपा के लिए अच्छी खबर नहीं आई। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए सबसे निराशाजनक बात विधानसभा उपचुनावों में पिछड़ना रहा है। आठ विधानसभा सीटों में से उसे केवल एक नेपानगर (मध्य प्रदेश) में जीत मिलती दिख रही है। इसके अलावा बाकी सभी सीटों पर भाजपा के विरोधी दलों ने बाजी मारी है। बंगाल की एकमात्र सीट पर तृणमूल कांग्रेस, तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक, पुदुचेरी में कांग्रेस और त्रिपुरा में सीपीएम के हाथ बाजी लगी। सीपीएम ने खरजला और खोवाई दोनों सीटें जीत ली। भाजपा को उम्मीद थी कि बंगाल और त्रिपुरा में उसे फायदा हो सकता है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। त्रिपुरा में हालांकि भाजपा दूसरे पायदान पर रही है। लेकिन लेफ्ट के गढ़ में सेंध लगाना उसके लिए अभी भी बड़ी चुनौती है। यहां कई साल से सीपीएम सत्ता में है। त्रिपुरा में भाजपा ने कई क्षेत्रीय दलों से गठजोड़ भी किया था।
वहीं बंगाल में ममता बनर्जी का जादू चल रहा है। उनकी पार्टी दोनों लोकसभा सीटों (कूचबिहार, तामलुक) पर बड़ी बढ़त बनाए हुए है। यहां पर एक विधानसभा सीट पर भी तृणमूल कांग्रेस आगे है। दक्षिण भारत में दो राज्यों तमिलनाडु व पुदुचेरी में विधानसभा सीटों पर उपचुनाव है। पुदुचेरी की नेलीथोपु सीट कांग्रेस ने जीत ली है। यहां पर कांग्रेस और द्रमुक गठबंधन सत्ता में है। तमिलनाडु की अरवाकुरुचि और तिरुपरनकुंद्रम विधानसभा सीट जयललिता के खाते में है। हालांकि असम की लखीमपुर सीट पर भाजपा ने बढ़त बना रखी है। मध्य प्रदेश की शहडोल लोकसभा व नेपानगर विधानसभा सीट पर भी भाजपा आगे है। लखीमपुर और शहडोल सीटें पहले भी भाजपा के पास थी। इन उपचुनावों के नतीजों को केंद्र सरकार के नोटबंदी के कदम पर जनता की राय के रूप में भी देखा जा रहा है। अगले साल देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में चुनाव होने हैं। इनमें से तीन गुजरात, गोवा और पंजाब में भाजपा सत्ता में है।
