जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता निर्मल सिंह ने पार्टी लाइन से हटते हुए बयान दिया है। उन्होंने तीन सप्ताह पहले भारतीय सेना द्वारा हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की हत्या को ‘हादसा’ बताया है। बुरहान को सुरक्षा बलों ने खुफिया तरीके से मार गिराया था। राज्य की पीडीपी-बीजेपी सरकार अभी भी इनामी आतंकी की हत्या पर सरकार की स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकी है। निर्मल सिंह ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर सुरक्षा बलों को पता होता कि अनंतनाग के बमडूरा गांव में बुरहान वानी मौजूद है, तो उसे जिंदा पकड़ने की कोशिश की जाती। सिंंह ने कहा, ”यह एक हादसा था। अगर हमें इस बारे में पहले पता होता तो हमनें ऑपरेशन से पहले जरूरी कदम उठा लिए होते।” लेकिन बयान के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने पलटते हुए कहा, ”तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है। मुझसे ऑपरेशन के बाद हुई हिंसा को रोक पाने में सरकार की नाकामी के बारे में पूछा गया था। मैंने कहा कि सावधानियां बरती जातीं तो बुरहान की हत्या के बाद हिंसा नहीं होती।”
इससे पहले भाजपा ने मुफ्ती के बयान (सुरक्षा बलों को वानी के बारे में नहीं पता था) से इतर राय जाहिर की थी। पार्टी ने कहा था कि सुरक्षा बलों काे पता था और ऐसे हालातों में आतंकी की पहचान से ‘फर्क नहीं पड़ता।’ वानी की हत्या को ‘सफलता’ बताते हुए भाजपा के कश्मीर प्रमुख सत शर्मा ने कहा था कि सुरक्षा बल ‘बिना जानकारी के’ एक्शन नहीं लेते। उन्होंने कहा, ”जहां तक घटना (वानी की हत्या) से जुड़े सवाल की बात है, निश्चित तौर पर सुरक्षा बलों को जानकारी थी। उन्हें पता था कि भीतर कौन था और उन्होंने सारी बातों पर गौर करने के बाद ही आगे बढ़ने का फैसला किया।”
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कश्मीर घाटी में 8 जुलाई को 22 साल के बुरहान वानी की हत्या के बाद हिंसा फैल गई थी। जिसके 49 लोग मारे गए और करीब 3,000 लोग घायल हुए। पाकिस्तानी ने वानी को ‘शहीद’ घोषित कर दिया और शीर्ष पाकिस्तानी नेताओं ने वानी की हत्या की जांच की मांग की थी। एक तरफ जहां सेना ने कहा कि इंटेलिजेंस इनपुट्स के आधार पर वानी को मार गिराया गया, वहीं मुफ्ती ने कहा कि अगर सुरक्षा बलों को उसकी पहचान पता होती, तो उसे ‘एक मौका’ दिया जाता।

