ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया ने मंगलवार को अपनी एक किताब में छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर किए गए कुछ दावों के लिए माफी मांगी है। दरअसल, साल 2003 में जेम्स लेन की किताब “Shivaji: Hindu King in Islamic India” प्रकाशित हुई थी। इस किताब में मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में कुछ ऐसे दावे किए गए थे, जिन्हें लेकर राजनीतिक दलों और खासतौर पर राइट विंग संगठनों में भारी नाराजगी देखी गई थी। विरोध इतना बढ़ा कि कई जगह प्रदर्शन हुए और उन लोगों को भी निशाना बनाया गया, जिनका इस किताब से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं था।
इसी मामले में पिछले साल दिसंबर में बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस को निर्देश दिया था। यह मामला मूल रूप से साल 2004 में सतारा से सांसद उदयनराजे भोसले की ओर से दायर किया गया था। अब उसी कड़ी में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
कौन हैं जेम्स लेन?
जानकारी के लिए बता दें कि जेम्स लेन एक जाने-माने लेखक हैं। उन्होंने Vision of God, Narratives, The Phenomenology of the Mahabharata और Epic of Shivaji जैसी किताबें लिखी हैं। उनकी किताब “Shivaji: Hindu King in Islamic India” की एक पंक्ति को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिसमें उन्होंने शिवाजी महाराज के शुरुआती जीवन से जुड़ी कुछ बातें लिखी थीं।
विवाद बढ़ने के बाद जेम्स लेन ने साल 2003 में ही माफी मांग ली थी। अपने जारी बयान में उन्होंने कहा था कि उन्हें भारत से बहुत प्रेम है और उन्होंने अपना जीवन भारतीय संस्कृति को समझने में लगाया है। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि उनकी किताब से लोगों की भावनाएं आहत हुईं और ऐसा करने की उनकी कभी मंशा नहीं थी।
शिवसेना का विरोध प्रदर्शन
हालांकि, लेखक की माफी के बावजूद विरोध प्रदर्शन नहीं रुके। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने संस्कृत विद्वान और इतिहासकार डॉ. श्रीकांत बहुलकर के कार्यालय पर हमला किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि लेन की किताब के ‘Acknowledgement’ सेक्शन में डॉ. बहुलकर का नाम दर्ज था। इसके बाद साल 2004 में भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (BORI) के परिसर में भी हिंसा हुई, जहां कई ऐतिहासिक किताबों, पांडुलिपियों, पेंटिंग्स और तस्वीरों को नुकसान पहुंचाया गया।
साल 2017 में पुणे की सेशंस कोर्ट ने इस मामले में संभाजी ब्रिगेड के 68 सदस्यों को बरी कर दिया था। साफ है कि इस एक किताब को लेकर विवाद कोई नया नहीं, बल्कि कई वर्षों से चला आ रहा है।
अखबार में मांगी माफी
इसी साल 7 जनवरी को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया ने अपने पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर शाहिद मंजूर खान की ओर से अखबार में माफी प्रकाशित की थी। जारी बयान में कहा गया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर किताब में कुछ ऐसी बातें थीं, जो प्रमाणिक नहीं थीं। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए प्रेस की ओर से कहा गया कि उन्होंने हमेशा सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा है और यह सुनिश्चित किया है कि उनकी किताबें और सामग्री पूरी दुनिया में सम्मान के साथ पढ़ी जाएं।
इस मामले में उन लोगों ने भी माफी मांगी, जिनका असल में किताब से कोई सीधा संबंध नहीं था। इनमें डॉ. श्रीकांत बहुलकर, बी.एन. मंजुल और सुचित्रा परांजपे शामिल हैं। बताया गया है कि डॉ. बहुलकर ने मराठी साहित्य को समझने में लेखक की मदद की थी, जबकि बी.एन. मंजुल उस समय भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट में लाइब्रेरियन थीं।
