हरियाणा और महाराष्ट्र में आगामी 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनावों के लिए वोट डाले जाएंगे। चुनावों के लिए दोनों ही राज्यों में राजनैतिक पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी हैं। दोनों ही राज्यों में अभी भाजपा की सत्ता है और ऐसा माना जा रहा है कि आगामी चुनावों में भी भाजपा ही दोनों राज्यों में सत्ता पर काबिज हो सकती है। बता दें कि एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केन्द्र में सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने साल 2014 के हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अन्य विरोधी पार्टियों की तुलना में 4 गुना अधिक रकम खर्च की थी।
बता दें कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, राजनैतिक पार्टियों ने बीते चुनावों में सबसे ज्यादा खर्च प्रचार पर किया था। वहीं उसके बाद सबसे ज्यादा खर्च यात्राओं पर हुआ था। एडीआर ने अपनी इस रिपोर्ट में कुल 6 राष्ट्रीय पार्टियों और 9 क्षेत्रीय पार्टियों के खर्च की गणना की है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2014 के महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों के दौरान 15 राजनैतिक पार्टियों को कुल 464.55 करोड़ रुपए का चंदा मिला था, जिसमें से पार्टियों ने 357.21 करोड़ रुपए खर्च किए थे।
भाजपा को अकेले 296.74 करोड़ रुपए का चंदा मिला था, जबकि उसका चुनाव में खर्च 217.68 करोड़ रुपए रहा था। खास बात ये है कि खर्च के मामले में भाजपा की सबसे करीबी पार्टी कांग्रेस थी, जिसे 84.37 करोड़ रुपए का चंदा मिला था और उसने कुल 55.27 करोड़ रुपए खर्च किए थे। ऐसे में पहले और दूसरे नंबर की पार्टियों के चंदे और खर्च के बीच का बड़ा अंतर साफ पता चलता है।
इनके अलावा सबसे ज्यादा रकम खर्च करने के मामले में अन्य टॉप 5 पार्टियां एनसीपी (41 करोड़), शिवसेना (17.94 करोड़) और बहुजन समाज पार्टी (6.296 करोड़) शामिल है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, सभी राजनैतिक पार्टियों ने इस दौरान प्रचार पर कुल 280.72 करोड़ रुपए यानि कि कुल खर्च की 77.36 प्रतिशत रकम खर्च की थी। वहीं यात्रा पर पार्टियों ने कुल 41.40 करोड़ रुपए खर्च किए। इसके बाद अन्य खर्चों पर 22.59 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
गौरतलब है कि इस खर्च में से भाजपा ने अकेले प्रचार पर 186.39 करोड़ रुपए खर्च किए, जो कि प्रचार पर कुल खर्च रकम का 66.40 प्रतिशत है।

