लोकसभा चुनाव 2019 में जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) न सिर्फ कमर कस चुकी है बल्कि उसके लिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दे रही है। इसी सिलसिले में बीजेपी ट्रेनिंग सेल ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मीडिया से कैसे रू-ब-रू होना है, इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए उन्हें सफलता का मीडिया मंत्र दिया है। जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक पार्टी ने नेताओं-कार्यकर्ताओं को मीडिया रिपोर्टर और संपादकों से नजदीकी बढ़ाने के टिप्स भी दिए हैं। गाइडलाइंस में कहा गया है कि अगर सप्ताह के बीच में प्रेस कॉन्फ्रेन्स किया जाता है तो उसका बेहतर प्रभाव पड़ सकता है। गाइडलाइंस के मुताबिक पार्टी प्रवक्ताओं को वेल ड्रेसअप रहने के भी निर्देश दिए गए हैं। ‘द मीडिया: अप्रोच एंड स्ट्रेटजी’ नामक गाइडलाइंस में पार्टी प्रवक्ताओं से KISS फार्मूला अपनाने को कहा गया है। KISS यानी Keep it short and Simple. (छोटा एवं सामान्य रखें।)
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक बीजेपी की इस गाइडलाइंस में कहा गया है कि अगर पार्टी नेताओं ने इसका पालन किया तो 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले का राजनीतिक परिदृश्य बदल सकता है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि टीवी चैनलों पर आने वाले पार्टी प्रवक्ताओं को शांत, सौम्य और मृदुभाषी दिखना चाहिए। उन्हें किसी भी सूरत में गुस्से का इजहार नहीं करना चाहिए। यहां तक कि डिबेट के दौरान पार्टी लाइन से हटकर कोई बयान भी नहीं देना चाहिए। उन्हें ऑडियो-वीडियो उपकरणों का भी व्यापक इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। गाइलाइंस के मुताबिक पार्टी प्रवक्ताओं को 10 से 40 सेकेंड की सारगर्भित बाइट ही देने को कहा गया है, ताकि रिपोर्टर या मीडियाकर्मियों को उसे एडिट करने की जरूरत ना पड़े और वो बड़ी सहजता से उसका इस्तेमाल कर सकें।
बीजेपी की गाइडलाइंस में कहा गया है कि जब जरूरी हो या किसी विषय पर मीडिया द्वारा पार्टी का पक्ष जानने की इच्छा हो तभी प्रेस कॉन्फ्रेन्स किया जाना चाहिए। गाइडलाइंस के मुताबिक सुबह 9.30 बजे से दोपहर 2 बजे तक रिपोर्टर को स्टोरी देना या बाइट देना उपयुक्त है क्योंकि इससे उसके पास स्टोरी फाइल करने का पर्याप्त समय होता है। बुकलेट में कहा गया है कि सप्ताह के बीच में प्रेस कॉन्फ्रेन्स करना अधिक लाभकारी होता है, इससे सप्ताहांत तक चर्चा होती रहती है। गाइडलाइंस के मुताबिक प्रेस कॉन्फ्रेन्स के वक्त मंच पर केवल दो नेता ही नजर आएं। इसके अलावा मंच पर हमेशा पार्टी का लोगों स्पष्ट तरीके से दिखना चाहिए। दिशा-निर्देश में यह भी कहा गया है कि कॉन्फ्रेन्स के दौरान रिपोर्टर को उचित सम्मान दिया जाय। उनके सवालों पर ‘नो कमेंट’ और ‘ऑफ द रिकॉर्ड्स’ कहने से बचा जाय। पार्टी ने प्रवक्ताओं को रिपोर्टर और संपादकों से घनिष्ठता बढ़ाने के लिए सप्ताह में कॉफी या भोजन पर उन्हें बुलाने के भी टिप्स दिए हैं।

