आयुष चिकित्सा पद्धति के तहत उपलब्ध विकल्प की बढ़ती मांग के साथ भ्रामक विज्ञापन ने मंत्रालय के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। देश में हर दिन ऐसे 230 से अधिक मामले पकड़े जा रहे हैं। इनमें बिना शोध गंभीर रोग का शर्तिया इलाज का दावा किया जाता है। मंत्रालय सूत्रों की माने तो देशभर काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो आयुष पद्धति को लेकर काम कर रहे हैं। इसमें कुछ लोग सही तो काफी लोग गलत अभ्यास भी कर रहे हैं। ऐसे ही लोग आयुष का सहारा लेकर चमत्कारी या शर्तिया इलाज का दावा करते हैं। इसमें खासकर कैंसर सहित दूसरे गंभीर रोग शामिल हैं।
ऐसे लोगों के चक्कर में फंसकर मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। कई बार मरीज की मौत या गंभीर रूप से बीमार होने की सूचना मिलती है। ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए आयुष मंत्रालय ने 30 मई को आयुष सुरक्षा पोर्टल को शुरू किया। इन छह माह में पोर्टल पर आए शिकायतों की जांच कर 2081 प्रतिकूल औषध प्रतिक्रिया (एडीआर) और 41572 भ्रामक विज्ञापनों को पकड़ा गया। इसके अलावा पिछले पांच साल में आयुष मंत्रालय द्वारा फार्मा को सतर्कता पर 2753 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 2.5 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचा।
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मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से आयुष को लेकर मांग लगातार बढ़ रही है। विश्व स्तर पर भारतीय दवाओं को स्वीकार किया गया है। इसे देखते हुए आयुष मंत्रालय ने साल 2026 से 2031 (पांच साल) की रूपरेखा तैयार की है। इसे जल्द ही संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा।
तैयार हुई रूप रेखा गया भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बजट में विस्तार के साथ दूसरे एकीकृत संस्थान को विकसित करना शामिल है। बता दें कि आयुष मंत्रालय का बजट मौजूदा स्वास्थ्य मंत्रालय के बजट के मुकाबले महज चार फीसद के करीब ही है। साल 2025-26 के लिए अनुमानित स्वास्थ्य बजट 95957.87 करोड़ रुपए रखा गया है। जबकि आयुष मंत्रालय के लिए साल 2025-26 के लिए अनुमानित बजट 3992.9 करोड़ रुपए रखा गया है।
विकसित होगा एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान
एलोपैथी की तर्ज पर आयुष की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए देशभर के सभी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आयुष-भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद एकीकृत अनुसंधान के लिए उन्नत केंद्र की स्थापना की जा रही है। आयुष मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने संयुक्त रूप से यह पहल शुरू की है। इन केंद्रों में एकीकृत स्वास्थ्य पर केंद्रित पहचाने गए विषयों पर अनुसंधान किया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि आयुष प्रणालियों के साक्ष्य-आधारित शोध डाटा उपलब्ध करवाने के लिए अभी तक कुल 43722 शोध प्रकाशित हुए हैं।
