सेना की सहायक व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले सेना के जवान यज्ञप्रताप सिंह कोर्ट मार्शल और 6 महीने जेल में बिताने के बाद अपने गांव वापस लौट गए हैं, लेकिन अभी भी वह सेना में सहायक व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात पर अड़े हैं। बता दें कि यज्ञप्रताप सिंह ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर सेना की सहायक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद सहायक व्यवस्था पर बहस छिड़ गई थी। हालांकि इसके खिलाफ आवाज उठाने के कारण यज्ञप्रताप सिंह का कोर्ट मार्शल कर दिया गया था और उन्हें सेना का अनुशासन तोड़ने के आरोप में 6 महीने जेल की सजा भी सुनायी गई थी।

अपनी सजा काटने के बाद मध्य प्रदेश के रीवा में स्थित अपने गांव पहुंचे यज्ञप्रताप सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में कहा कि “मेरी लड़ाई सेना में मौजूद सहायक व्यवस्था के खिलाफ जारी रहेगी। यह एक औपनिवेशी परंपरा है, जो कि ग्रेट ब्रिटेन में भी खत्म हो चुकी है। मेरी भी यही मांग है कि जो अधिकारी सहायकों से सेवकों वाले काम जैसे जूते पॉलिश कराना, कुत्तों को घुमाना आदि कराते हैं, उनके खिलाफ कारवाई होनी चाहिए। यह नियमों के खिलाफ है। मेरे पास सभी जरुरी कागजात हैं जिन्हें मैंने आरटीआई की मदद से इकट्ठा किया है।” बता दें कि सहायक सिपाही वो लोग होते हैं, जो अधिकारियों और जूनियर कमीशंड अधिकारियों की मदद के लिए होते हैं, लेकिन आमतौर पर उनसे सेवकों वाले काम कराए जाते हैं। यज्ञप्रताप सिंह का कहना है कि उन्होंने सेना देश के दुश्मनों से लड़ने के लिए ज्वाइन की थी, ना कि सेवकों वाले काम करने के लिए।

यज्ञप्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने सेना से सहायक व्यवस्था को हटाने के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा था, लेकिन जब सेना को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने मुझे निगरानी में रखा और लगातार मानसिक दबाव के चलते मैंने नवंबर, 2017 को सेना से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लिया था। उल्लेखनीय है कि सेना से रिटायरमेंट के बाद यज्ञप्रताप सिंह की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। यज्ञप्रताप के पास अब आजीविका चलाने के लिए सिर्फ डेढ़ एकड़ पुश्तैनी जमीन का ही सहारा है। अपने बेटे की स्कूल फीस भरने के लिए भी यज्ञप्रताप को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद यज्ञप्रताप सिंह की पत्नी का कहना है कि वह अपने पति के साथ हैं क्योंकि वह न्याय के लिए लड़ रहे हैं।