केन्द्र की मोदी सरकार अपनी जिन कल्याणकारी योजनाओं को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, उनमें उज्जवला योजना भी शामिल है। सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत अब तक 7 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जहां सरकार ने देशभर में इतनी बड़ी संख्या में एलपीजी कनेक्शन बांटने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के गांवों में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर काम करने वाली आंगनवाड़ी सेविकाएं ही इस सुविधा से महरूम हैं। एबीपी न्यूज के पत्रकार ने इस बारे में जब आंगनबाड़ी सेविकाओं से बात करने की कोशिश की तो उनका गुस्सा फूट पड़ा और वह अपनी परेशानी बताते हुए भावुक हो गई।
दरअसल जब पत्रकार ने बिहार के किशनगंज में एक गांव की आंगनबाड़ी सेविका से इस बारे में सवाल किया तो आंगनबाड़ी सेविका ने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि वह लोग भूसे और लकड़ी आदि से चूल्हा जलाते हैं। क्या सरकार की इस पर नजर नहीं पड़ती है? आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि उन्हें इंदिरा आवास योजना, उज्जवला योजना, राशन कार्ड आदि सरकारी लाभ नहीं मिलता है। महिला ने तंज कसते हुए कहा कि उस वक्त हमें कहा जाता है कि हम ‘सरकारी कर्मी’ हैं। महिला ने बताया कि सरकारी कर्मी के नाम से आज उनके पास कुछ नहीं है।
वहीं एक अन्य आंगनबाड़ी सेविका ने बताया कि जिस वक्त काम की बात आती है तो उन्हें बताया जाता है कि वह सरकारी कर्मी हैं। वहीं जब मानदेय की बात आती है तो हमें ‘समाज सेवक’ बता दिया जाता है! बता दें कि आंगनबाड़ी सेविका का औसतन मानदेय करीब 5-6 हजार रुपए महीना होता है। आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा कई बार मानदेय को बढ़ाने के लिए विरोध प्रदर्शन भी किए गए हैं। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
क्या है उज्जवला योजना का उद्देश्यः भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा उज्जवला योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को खासकर ग्रामीण इलाकों में चूल्हे पर जीवाश्म ईंधन की मदद से खाना बनाने वाली महिलाओं की मदद करना है। चूल्हे के निकलने वाले धुएं से कई तरह की बीमारियों का भी खतरा है। देश के 24 करोड़ परिवारों में से 10 करोड़ परिवार खाना बनाने के लिए चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे थे। अब उज्जवला योजना की शुरुआत के बाद से अब तक सरकार द्वारा 7 करोड़ एलपीजी गैस कनेक्शन वितरित करने का दावा किया गया है।
क्या हैं उज्जवला योजना का लाभ पाने की पात्रताः उज्जवला योजना के तहत 18 साल से अधिक उम्र की महिला ही इस योजना का लाभ उठा सकती है। महिला आवेदक गरीबी रेखा से नीचे (BPL कार्ड होल्डर) की नागरिक होनी चाहिए। साथ ही आवेदक के घर पर पहले एलपीजी गैस का कनेक्शन भी नहीं होना चाहिए। आंगनबाड़ी सेविकाओं की बात करें तो अधिकतर उज्जवला योजना का लाभ पाने की हकदार हैं, लेकिन सरकारी नीति के चलते उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

