AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। उन्‍होंने तीन तलाक पर लोकसभा में पेश विधेयक पर बहस की तुलना बाबरी मस्जिद विध्‍वंस के दिन से कर डाली है। ओवैसी ने कहा कि बहस के दौरान लोकसभा का दृश्‍य 6 दिसंबर (1992) जैसा था। हम न तो 6 दिसंबर को भुला सकते हैं और न ही गुरुवार (28 दिसंबर) के दिन को भुलाया जा सकता है। ओवैसी शुरुआत से ही मुस्लिम महिला (विवाह में अधिकारों का संरक्षण) विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं। ओवैसी ने इस मसले पर सदन में सुझाव भी दिए थे, जिसे खारिज करते हुए विधेयक को पारित कर दिया गया था। अब रज्‍यसभा में इस पर बहस होनी है।

ओवैसी ने ‘इंडिया टुडे’ को दिए इंटरव्‍यू में तीन तलाक पर लोकसभा में बहस की तुलना बाबरी विध्‍वंस से की है। विरोध के बावजूद विधेयक पास होने पर उन्‍होंने कहा कि यदि कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्‍नी को तीन बार तलाक बोल कर डिवोर्स देता है तो वह अपराध है। इसे रोका जाना चाहिए। ओवैसी ने कहा कि इस बाबत कोई आंकड़ा उपलब्‍ध नहीं है, जिससे इस बात की पुष्टि हो सके कि तीन तलाक सबसे बड़ी सामाजिक बुराई है और समाज को इससे नुकसान हो रहा है। लोकसभा सदस्‍य ने विधेयक में तीन साल कैद के प्रावधान पर कड़ी आपत्ति जताई थी। ओवैसी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट पहले ही व्‍यवस्‍था दे चुका है कि महज तीन तलाक बोल देने भर से विवाह खत्‍म नहीं हो सकता है, ऐसे में तीन साल जेल के प्रावधान की जरूरत ही क्‍या है? महिलाओं की सुरक्षा के लिए पहले से ही कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।’

https://youtu.be/uO2lhZWseno

NDA सरकार ने तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के लिए विधेयक लाया है। लोकसभा में इसे पारित किया जा चुका है। राज्‍यसभा से पारित होने और राष्‍ट्रपति की मुहर लगने के बाद यह कानून में तब्‍दील हो जाएगा। ओवैसी सांसद होने के साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी अध्‍यक्ष भी हैैं। हालांकि, कई दलों ने इसका समर्थन किया है। मालूम हो कि फोन या व्‍हाट्सएप के जरिये तीन तलाक बोलकर विवाह खत्‍म करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कानून बनने के बाद ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।