एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार (13 अगस्त) को कहा कि कोई व्यक्ति या संगठन मस्जिद दान नहीं कर सकता, क्योंकि मस्जिद का मालिक तो अल्लाह है। ओवैसी का यह बयान तब आया है, जब शिया वक्फ बोर्ड ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवादित क्षेत्र की बजाय कुछ दूरी पर बन सकती है।
शिया वक्फ बोर्ड के हालिया रुख पर हैदराबाद के सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मस्जिद का प्रबंधन शिया, सुन्नी, बरेलवी, सूफी, देवबंदी, सल्फी, बोहरी समुदाय द्वारा किया जा सकता है, लेकिन वे इसके मालिक नहीं हैं।” ओवैसी ने कहा, “यहां तक कि एआईएमपीएलबी (ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड) भी किसी को मस्जिद नहीं दे सकता।”
सांसद ने कहा, “मस्जिद सिर्फ एक मौलाना भर के कहने से नहीं दी जा सकती। अल्लाह इसका मालिक है, मौलाना नहीं। एक मस्जिद हमेशा मस्जिद रहेगी।” उन्होंने ट्वीट किया कि सर्वोच्च न्यायालय जो मामले की सुनवाई कर रहा है वह साक्ष्यों के आधार पर इसका फैसला करेगा।
बता दें कि शिया बोर्ड ने 8 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय से कहा था कि मस्जिद मुस्लिम बहुल इलाके में मंदिर-मस्जिद विवाद वाले स्थल से उचित दूरी पर बनाई जा सकती है। शिया बोर्ड ने बाबरी मस्जिद स्थल को अपनी संपत्ति बताते हुए कहा कि वह इस मसले पर बातचीत करने का हकदार है। इसके अलावा शिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कल्बे सादिक ने भी आज एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर अदालत ने वहां मस्जिद बनाने का आदेश दिया तब भी वे लोग वहां मंदिर ही बनाने को कहेंगे। उन्होंने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट बाबरी मस्जिद के पक्ष में फैसला देता है तो मुस्लिम समुदाय को जमीन से अपना दावा छोड़ इसे हिंदुओं के दे देनी चाहिए। शिया धर्मगुरु ने ये बात वर्ल्ड पीस एंड हारमनी कॉन्कलेव कार्यक्रम में कही हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को दोनों समुदायों द्वारा सम्मान के साथ पेश किया जाना चाहिए।
