सुप्रीम कोर्ट ने आधार की वैधता पर ऐतिहासिक फैसला दिया है। पांच जजों की संविधान पीठ ने आधार की संवैधानिकता पर मुहर लगा दी है। हालांकि, पीठ में शामिल एक जज ने आधार के खिलाफ फैसला दिया है। जस्टिस डीवाई. चंद्रचूड़ ने बहुमत के निर्णय के प्रति असहमति जताई है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने मोबाइल फोन नंबरों को आधार से लिंक करने की अनिवार्यता को भी खारिज करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है। साथ ही उन्‍होंने सेवा प्रदाता कंपनियों को मोबाइल सिम को आधार नंबर से लिंक कराने के एवज में हासिल डेटा को डिलीट करने का निर्देश दिया है। उन्‍होंने टिप्‍पणी की कि मोबाइल फोन जीवनशैली और पसंद-नापसंद या प्राथमिकताओं से जुड़ी सूचनाओं का स्‍टोरहाउस है। बता दें कि मोबाइल नंबर हासिल करने के लिए आधार नंबर को जरूरी कर दिया गया था। टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों ने व्‍यापक पैमाने पर सिम कार्ड को आधार नंबर से लिंक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। जस्टिस चंद्रचूड़ के फैसले के बाद अब सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को अब जुटाए गए डेटा को डिलीट करना होगा।

‘इंसान को 12 डिजिट तक कर दिया सीमित’: जस्टिस चंद्रचूड़ ने आधार की अनिवार्यता को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्‍होंने तल्‍ख टिप्‍पणी करते हुए अपने फैसले में कहा, ‘आधार ने इंसान की बहुलतावादी पहचान को नकार दिया और उसे 12 अंकों तक सीमित कर दिया।’ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सरकार को पहले डेटा को सुरक्षित रखने की पुख्‍ता व्‍यवस्‍था करने का निर्देश दिया। उन्‍होंने डेटा लीक होने पर भी तल्‍ख टिप्‍पणी की और स्‍पष्‍ट किया कि आधार कानून के पहले निजी कंपनियों द्वारा पर्सनल डेटा जुटाने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं थी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने बहुमत द्वारा दिए गए फैसले के कई पहलुओं से असहमति जताई। बता दें कि मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने आधार नंबर के जरिये जुटाए गए डेटा की सुरक्षा को लेकर संविधान पीठ को आश्‍वस्‍त करने की पूरी कोशिश की थी। विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण के प्रमुख अजय भूषण पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में डेटा सुरक्षा को लेकर प्रेजेंटेशन भी दिया था। उन्‍होंने दावा किया था कि आधार से हासिल डेटा को लीक कर पाना संभव नहीं है। हालांकि, डेटा लीक की कई खबरें सामने आ चुकी हैं।