500 और 1000 के नोट बैन पर राज्य सभा में छोटी लेकिन तीखी बहस के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लंच ब्रेक में गर्मजोशी से हाथ मिलाए। इससे पहले सदन में मनमोहन सिंह ने कहा कि नोट बैन एक संगठित लूट की तरह है। उन्होंने मोदी सरकारी की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इससे विकास दर 2 फीसदी नीचे जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस फैसले को लागू किया गया है, उससे साफ जाहिर होता है कि मोदी सरकार बुरी तरह से फेल हो रही है लेकिन जैसे ही सदन में लंच ब्रेक हुआ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे बढ़कर मनमोहन सिंह से हाथ मिलाया।
मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार के इस फैसले से 60 से 65 लोगों की जान चली गई है जबकि आम लोग परेशान हैं लेकिन ये साफ नहीं है इससे फायदे क्या होंगे। उन्होंने कहा, “मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि हम नहीं जानते कि इससे क्या फायदे होंगे। जो लोग गरीब और कमज़ोर हैं उसके लिए ये 50 दिन काफी भारी पड़ेंगे।” राज्य सभा में जैसे ही मनमोहन सिंह बोलने के लिए खड़े हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें रोकते हुए पहले विपक्ष को सदन चलने देने की बात कही। इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने जेटली को विरोध किया और इसे शर्मनाक करार दिया।
सिंह ने इसे लंबे समय में फायदेमंद बताने वालों को जॉन्किंस के लंबे समय में सभी के खत्म हो जाने की बात को याद दिलाया। सिंह ने राज्य सभा में सरकार के फैसले से जुड़ी कई कमियों पर अपनी बात रखते हुए इस योजना के खराब क्रियान्वयन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस फैसले से आतंकवाद खत्म करने की बात कही और मैं इससे सहमत भी हूं लेकिन इसे मैनेज करने में बड़ी चूक हुई है।

