National Register of Citizens (NRC): असम सरकार ने इस स्वतंत्रता दिवस पर एक रोल ऑफ ऑनर कार्यक्रम रखा था। इसके तहत प्रदेश के कई वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान दिया गया। सम्मान मिलने वाले लोगों की सूची में एक नाम 79 वर्षीय सांस्कृतिक कार्यकर्ता सुनीरमल बागची का भी था। इस कार्यक्रम के जरिये असम सरकार ने बागची को वो सम्मान दे दिया जो कुछ महीने पहले उनसे NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) ने छीन लिया था।
दरअसल 26 जून को बागची को पता चला कि उसका नाम एनआरसी के मसौदे से हटा दिया गया है। बागची के लिए ये किसी झटके से कम नहीं था। लेकिन दो महीने बाद एक और घोषणा सामने आई कि राज्य सरकार की स्वतंत्रता दिवस सम्मान सूची में उनका नाम है और उन्हें मासिक पेंशन मिलेगी। बागची ने कहा “मैंने इस सम्मान को एक भारतीय के रूप में जीता है, लेकिन फिर भी यह नहीं समझ पा रहा हूं कि मेरा नाम NRC में क्यों नहीं है। मुझे लगता है कि पेंशन मेरी नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं गिनी जाती है।”
बागची ने आगे कहा ““मैंने अपना सारा जीवन यहां बिताया है। मेरे पिता सिलचर में एक सरकारी चिकित्सा अधिकारी थे। मेरे पास मेरा जन्म प्रमाण पत्र है, जो सिलचर नगर मंडल द्वारा जारी किया गया है। मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि मैं विदेशी कैसे हो गया। बागची के अनुसार, उनका नाम एनआरसी के मसौदे में उनके परिवार के पांच सदस्यों के साथ था। उन्होंने बताया “जब मुझे अतिरिक्त बहिष्करण सूची में अपना नाम मिला तो मुझे समझ नहीं आया कि अब क्या करना चाहिए।मुझे एक नोटिस मिला जिसमें मुझे सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ NRC सेवा केंद्र में उपस्थित होने के लिए कहा गया।”
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एनआरसी को लेकर परेशान होने वाले बागची अकेले नहीं है। पिछले साल प्रकाशित एनआरसी मसौदा में शामिल किए गए एक लाख से अधिक लोगों का अतिरिक्त मसौदा बहिष्करण सूची में स्थानांतरित किए गए हैं। पुन: सत्यापन के अंतिम दौर के बाद, वे सभी यह देखने के लिए इंतजार कर रहे हैं कि क्या उन्हें फिर से नागरिकता रोल में शामिल किया जाएगा।
