देश में वन्यजीव अभयारण्य के लिए 13 स्थलों को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (इको सेंसेटिव जोन) बनाया जाएगा। शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि नए अभयारण्य क्षेत्रों को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दी है। ये क्षेत्र तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र में विकसित किए जाएंगे। अब इन क्षेत्रों में पारिस्थितिकी तंत्र का वैज्ञानिक संरक्षण किया जा सकेगा और इन क्षेत्रों का पर्यावरण नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। मंत्रालय के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्र घोषित होने के बाद अब इन क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में केवल हरित गतिविधियां ही संचालित की जा सकेगी। केंद्र सरकार के नियम के तहत अभयारण्य से 10 किमी की दूरी पर ही खनन हो सकता है। वर्तमान में कई क्षेत्रों में पाया गया कि हरित क्षेत्रों के अंदर जाकर की खनन हो रहा है, ये आदेश इन क्षेत्रों को बचाने के लिए मददगार साबित होंगे।
मंत्रालय का दावा है कि नए प्रावधान से किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों व छोटे रोजगारों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस समय भारत में 651 सुरक्षित क्षेत्रों में से 316 ईएसजेड अधिसूचना के तहत आ गए हैं। अब ऐसे संरक्षित इलाकों के 10 किलोमीटर के दायरे में खनन, पत्थर उत्खनन और पत्थर तोड़ने वाली इकाइयां स्थापित नहीं होंगी।
पर्यावरण मंत्री के मुताबिक तमिलनाडु में वदुवुर वन्यजीव अभयारण्य, कंजिराम्कुलम पक्षी अभयारण्य, श्रीविल्लवीपुथुर ग्रिज्जलेद स्कुइर्रेल वन्यजीव अभयारण्य, मेघममलाई वन्यजीव अभयारण, गल्फऑफ मन्नार मरीन नेशनल पार्क, वेततानगुदी पक्षी अभयारण्य, कोडैकानल राष्ट्रीय उद्यान, ओसुदु लेक पक्षी अभयारण्य व पॉइंटक कालिमेरे वन्य अभयारण्य शामिल है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ में एक बाघ अभयारण्य और महाराष्ट्र के तुंगरेश्वर वन्यजीव अभ्यारण्य को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने को मंजूरी दी है।
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संवदेनशील क्षेत्र घोषित होने के बाद पर्यावरण मंत्रालय इन क्षेत्रों में संरक्षण की गतिविधियां बढ़ा सकेगा। हरित क्षेत्रों में बढ़ रही मानवीय गतिविधियों के बाद यह मामला अदालत तक पहुंचा था। अदालत ने भी इस संबंध में सभी जगहों पर ऐसे पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र स्थापित करने के आदेश दिए थे।
