Neeraj Chopra: टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए आज का दिन बेहद खास रहा है। पहले बजरंग पुनिया ने कांस्य जीता और अब नीरज चोपड़ा ने इतिहास रच दिया है। जिस लम्हा का भारतीयों को इंतजार था आखिर वो पल ही गया। भारत के जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने तेरह सालों का सूखा खत्म कर गोल्ड मेडल पर निशाना साधा। एथलेटिक्स में अब तक का पहला पदक दिलाने वाले नीरज की जर्नी बेहद दिलचस्प रही है। हरियाणा के छोरे नीरज ने इससे पहले 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी पदक जीता था। उनसे जुड़ी खास बातें यहां जानें –
टीनेज में मोटापे से थे ग्रस्त: टाइम्स ऑफ इंडिया के एक इंटरव्यू में ओलंपिक मेें गोल्ड जीतने वाले नीरज के अंकल ने बताया था कि वो बचपन से ही हेल्दी थें। ऐसे में उनकी सेहत को बेहतर करने के इरादे से घरवालों ने नीरज को जिम जॉइन करने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने पानीपत के शिवाजी स्टडियम में मैदान पर दौड़ लगाना भी शुरू किया ताकि फिटनस बनी रहे। इसी मैदान में उन्होंने पहली बार भाला फेंका था और उनके प्रदर्शन को देखकर सभी खिलाड़ी अचंभित रह गए थे।
परिवार की आर्थिक स्थिति को नहीं बनने दी बाधा: भाला फेंकने की उन्होंने प्रैक्टिस तो शुरू कर दी लेकिन माली हालत ठीक नहीं होने से कई समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। बताया जाता है कि नीरज किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और संयुक्त परिवार में रहते हैं। उनकी फैमिली में 17 लोग रहते हैं, एक समय ऐसा था जब पैसों की किल्लत से नीरज भाला भी नहीं खरीद पाए। उस समय एक अच्छे भाले की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये थी।
हालांकि, नीरज का अभ्यास बिना रुके चलता रहे इसके लिए पिता और चाचा ने सात हजार रुपये जोड़कर सस्ता भाला खरीदा। बताया जाता है कि वो रोजाना करीब 7 से 8 घंटे प्रैक्टिस करते थे।
यूट्यूब को बनाया गुरु: आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से नीरज को सिखाने के लिए कोच भी नहीं मिल रहा था। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और यूट्यूब चैनल के जरिये ही भाला फेंकने की बारीकियों को समझने लगे। वो रोजाना इस खेल से जुड़ी वीडियोज को देखकर मैदान में उसे करने की कोशिश करते और अपनी खामियों को ठीक करने का प्रयत्न किया। फिर बाद में नीरज यमुनानगर में प्रशिक्षण लेने लगे।

