सेनिटरी नैपकिन नारी स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उत्पाद है। महिलाएं मासिक धर्म के दौरान इसका इस्तेमाल करती हैं। इसका इस्तेमाल सुविधाजनक तथा आसान होता है। सैनिटरी नैपकिन्स पर्यावरण के लिए सही नहीं होते हैं। इनमें इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक्स और केमिकल्स पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। सैनिटरी नैपकिन को लेकर सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि ये इसे इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सेहत के लिए भी हानिकारक होते हैं। चलिए जानते हैं कि सैनिटरी पैड्स और टैपोन्स किस तरह से सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं।
1. कैंसर के होते हैं कारक – सैनिटरी नैपकिंस तुरंत कैंसर का कारण नहीं होते लेकिन अगर इनका इस्तेमाल लंबे समय तक बार-बार किया जाए तो इससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। कुछ नैपकिंस में ऐसे केमिकल्स इस्तेमाल किए गए होते हैं जो मानव शरीर में प्रवेश कर उसकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
2. पैड्स में मौजूद होते हैं कीटनाशक – सैनिटरी पैड्स दो तरह के होते हैं, जेल पैड्स और कॉटन पैड्स। अगर आप कॉटन पैड्स को ज्यादा सेफ मानती हैं तो आप गलत हैं। दरअसल कॉटन पैड्स कॉटन प्लांट से बने होते हैं। कॉटन प्लांट्स की पैदावार के दौरान उसमें कीटनाशक और तृणनाशक केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है। जब आप इन पैड्स का इस्तेमाल करती हैं तो कीटनाशकों के कुछ अंश आपके रक्त में प्रवेश करते हैं और आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
3. प्रजनन क्षमता पर दुष्प्रभाव – मासिक धर्म के दौरान स्राव से आने वाले अप्रिय दुर्गंध को रोकने के लिए कुछ पैड्स में इत्र आदि का इस्तेमाल किया जाता है। यह बेहद नुकसानदेह होता है। ऐसे पैड्स का इस्तेमाल भ्रूण विकास और आपकी प्रजनन क्षमता दोनों पर बुरा असर डालता है।
विकल्प – मासिक धर्म में इस्तेमाल करने के लिए सैनिटरी पैड्स के कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें से ही एक है मेन्स्ट्रुअल कप। यह एक लचीला सिलिकॉन कप होता है जो आराम से वेजिना में इन्सर्ट कराए जा सकते हैं।
