एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में गर्भ में पल रहा बच्चा बाहर की आवाजों को थोड़ा बहुत महसूस कर सकता है। बाहर की आवाजों को सुनकर बच्चे के दिल की धड़कन में बदलाव आता है जिससे गर्भ में उसकी हरकत की वजह से थोड़ी हलचल होने लगती है। प्रेग्नेंसी में अक्सर मां-बाप गर्भ में पल रहे अपने बच्चे से बातचीत करने की कोशिश करते रहते हैं। ऐसे में एक सवाल जरूर उनके मन में आता होगा कि उनका बच्चा गर्भ के अंदर क्या उनकी बातों को सुन या महसूस कर सकता है। इस रिसर्च में इसी सवाल का जवाब पता लगाने की कोशिश की गई है।
इस रिसर्च में 20 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था। 8 माह की प्रेग्नेंट इन महिलाओं के सामने कुछ खास तरह की आवाजें निकाली गईं जिसके बाद यह पाया गया कि बच्चे बाहर की आवाजों को सुनकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। इस आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चे 8वें महीने से बाहर की आवाजों को सुन सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस रिसर्च के बाद यह बात प्रमाणित हो जाती है कि बच्चों के जन्म से पहले ही उनके सुनने की क्षमता विकसित हो जाती है। बाद में जब बच्चा पैदा होता है तब उसकी इस क्षमता का और ज्यादा विकास होता है और धीरे-धीरे वह बोलना-सुनना सीखता है।
गर्भ में मौजूद भ्रूण बाहर की आवाजों को महसूस करने की कोशिश करता है। गर्भावस्था के दौरान सबसे ज्यादा मां के पास रहने की वजह से उसे मां की आवाजों की पहचान ज्यादा हो जाती है। इस वजह से पैदा होने के बाद बच्चा मां की आवाज को सबसे पहले पहचानता है। रिसर्चर्स कहते हैं कि बच्चे के सुनने की क्षमता कुछ विशेष ध्वनियों की वजह से होती है। इसी के साथ उनमें ऑडिट्री कॉर्टेक्स का विकास शुरू हो जाता है जिसकी वजह से जन्म के बाद बच्चा सुनना और फिर बोलना शुरू करता है।
