Lohri Festival History: लोहड़ी का त्योहार उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इसे खास तौर पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले सेलिब्रेट किया जाता है। इस साल यह त्योहार आज यानी 12 जनवरी को मनाया जा रहा है।

क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार?

लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से नई फसल के आने और कृषि जीवन से जुड़ी खुशियों का प्रतीक माना जाता है। पंजाब में लोहड़ी का खास महत्व होता है। यहां इस त्योहार को बड़े ही उत्साह और पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है। यह पर्व सर्द ऋतु के अंत और बसंत के स्वागत का संकेत भी देता है।

कब से शुरू होता है लोहड़ी?

लोहड़ी का उत्सव सुबह से ही शुरू हो जाता है और देर रात तक उल्लास के साथ चलता है। इस दिन किसी प्रकार का उपवास नहीं रखा जाता है। लोग नाच-गाने और स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं। वहीं, पंजाब में लोहड़ी के अवसर पर लोग भांगड़ा और गिद्दा के साथ-साथ ढोल की थाप पर झूमते नजर आते हैं।

कैसे मनाई जाती है लोहड़ी?

लोहड़ी के दिन लकड़ियों या उपलों को इकट्ठा कर अग्नि जलाई जाती है। लोग इस अग्नि में नई फसल से जुड़ी वस्तुएं अर्पित करते हैं। खास तौर पर इस दिन अग्नि में रेवड़ी, तिल, मूंगफली, गुड़ और गजक अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। इसके बाद तिल, गुड़, गजक, मूंगफली और मक्के के दानों का प्रसाद आपस में बांटा जाता है।

लोहड़ी पर फेमस है दुल्ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन इनमें दुल्ला भट्टी की कथा सबसे ज्यादा फेमस है। मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में पंजाब में दुल्ला भट्टी नाम का एक लुटेरा रहता था। कहा जाता है कि वह अमीरों के घरों से लूटकर गरीबों में बांट देता था।

इसके साथ ही उसने एक ऐसा अभियान भी चलाया, जिसके तहत वह उन गरीब लड़कियों का विवाह करवाता था, जिन पर शाही जमींदारों और शासकों की बुरी नजर होती थी। कई बार इन लड़कियों को अगवा कर गुलाम बनाकर दासियों जैसा व्यवहार किया जाता था। ऐसी लड़कियों के लिए दुल्ला भट्टी वर ढूंढता था और उनका विवाह करवाता था।

एक बार दुल्ला भट्टी को दो ऐसी बहनों के बारे में पता चला, जो काफी रूपवान थीं। इन बहनों के नाम सुंदरी और मुंदरी थे। इन दोनों गरीब बहनों को एक जमींदार ने अगवा कर लिया था। दुल्ला भट्टी उन्हें छुड़ाकर अपने साथ ले आया। इसके बाद उसने उनके लिए वर ढूंढे और जंगल में लकड़ियां इकट्ठा कर आग जलाकर दोनों बहनों का विवाह कराकर कन्यादान किया।

इस घटना के बाद पूरे पंजाब में दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि दी गई। इसी कारण लोहड़ी के अवसर पर दुल्ला भट्टी के सम्मान में ‘सुंदर मुंदरिए’ नामक लोकगीत गाया जाता है।