त्योहार केवल उल्लास और आनंद के लिए नहीं होते। त्योहार लोगों को जोड़ने का भी काम करते हैं। हिंदू धर्म के तमाम त्योहारों के पीछे एक सामाजिक सोच है, जो सीधे तौर पर लोगों के जीवन से जुड़ी हुई है। फसलों के कटने के बाद का उत्सव रंगों और गुलालों से मनाने की परंपरा न जाने कितनी सदियों से चली आ रही है। होली अब भी उसी उल्लास और ऊर्जा के साथ मनाई जाती है, जैसे सैकड़ों वर्ष पहले मनाई जाती थी। आज की जीवनशैली में जब आजीविका के लिए लोग परिवारों के बिखराव के साथ एक भावनात्मक संकट से जूझ रहे हैं, होली जैसे पर्व परिवार के लोगों को एक जगह मिलने का मौका देते हैं और संबंधों की डोर को न सिर्फ टूटने से बचाते हैं, बल्कि उन्हें और मजबूत करते हैं।
त्योहारों पर आज भी ज्यादातर परिवारों में बाहर बस गए सभी सदस्य इकट्ठे होते हैं और साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं। बच्चे इसमें ज्यादा उत्साह से भाग लेते हैं। त्योहारों का वक्त जितना खुशियों और रौनक से भरा होता है, त्योहारों के समाप्त होने के बाद जब सभी अपनी नियमित जीवनचर्या की ओर लौटते हैं, तब वह उतना ही नीरस, उदास और तनावपूर्ण हो जाता है। ऐसे माहौल में अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ावा मिलता है। शेम्रॉक प्रीस्कूल्स की कार्यकारी निदेशक और शेम्फोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल्स की संस्थापक मीनल अरोड़ा इस तनाव से बचने के लिए कुछ उपाय बताती हैं। आइए, जानते हैं कि वे उपाय क्या हैं।
1. नियमित दिनचर्या में आराम से लौटें – मीनल अरोड़ा के मुताबिक, बच्चे त्योहारों को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं, क्योंकि इस दौरान उन्हें अपने दोस्तों और परिवार के लोगों से मिलने-जुलने का मौका मिलता है। लेकिन जब वो अपनी नियमित दिनचर्या की ओर लौटते हैं, तब उन्हें अपने खुशी और आनंद के उन पलों को भुला पाना मुश्किल होता है और वे उदास हो जाते हैं। इस दौरान उन्हें अपनी नियमित दिनचर्या में लौटने के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए, बल्कि माता-पिता को चाहिए कि वे उन्हें सामान्य होने में उनकी मदद करें। इसके लिए वे उनके साथ समय बिताएं, उन्हें खेलने और किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें। इससे उन्हें जल्द सामान्य होने में मदद मिलेगी।
2. बढ़िया भोजन और अच्छी नींद –त्योहार के मौसम में बच्चों और सभी को तनाव से बचाने के लिए पोषण पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए जंक फूड्स, बेवरिज और मिठाइयों के ज्यादा सेवन से परहेज करना चाहिए। भोजन में ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्व लेने चाहिए। इसके अलावा, दिमाग को तरोजाता बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में नींद लेना भी बेहद जरूरी है। रात में तकरीबन 8-10 घंटे की अच्छी नींद बेहद जरूरी है।

