कैल्शियम शरीर के लिए आवश्यक खनिज लवण है। हड्डियों और दांतों के निर्माण एवं मजबूती के साथ शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। हममें से कई लोग इसकी कमी होने पर कैल्शियम की गोलियां खाना शुरू कर देते हैं। ऐसा करने से बेहतर है कि आहार में कैल्शियम को जोड़ा जाए। इससे शरीर में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम बनने लगेगा। इस बारे में और भी कई उपयोगी बातें बता रही हैं पूनम मिश्रा।
हमारे दांत और हड्डियां कैल्शियम के बने होते हैं। शरीर का 99 फीसद से भी ज्यादा कैल्शियम दांतों और हड्डियों में होता है, जो कंकाल की संरचना और उसके कार्यों में सहायता प्रदान करता है। वहीं एक फीसद कैल्शियम मांसपेशियों-धमनियों के संकुचन, विस्तार और तंत्रिका प्रणाली के महत्वपूर्ण कार्यों में सहायता करता है। कैल्शियम की कम मात्रा से ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भावस्था के दौरान
एक गर्भवती महिला को सामान्य अवस्था से लगभग दोगुनी मात्रा में कैल्शियम की आवश्यकता होती है, क्योंकि महिला के शरीर में भ्रूण का विकास हो रहा है। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. राजेश बत्रा का कहना है कि अगर कोई गर्भवती महिला कैल्शियम की सही मात्रा नहीं लेती है तो उससे बच्चे के विकास में बाधा पहुंच सकती है, महिला का समय से पूर्व प्रसव या गर्भपात भी हो सकता है। कैल्शियम की कमी से गर्भ में पल रहा बच्चा मानसिक या शारीरिक रूप से कमजोर या अपंग भी हो सकता है।
उम्र का फर्क
जन्म के साथ ही बच्चे का शारीरिक विकास शुरू हो जाता है। सात से आठ महीने में दांत आने लगते हैं। बच्चों में बढ़ती उम्र के साथ कैल्शियम की मात्रा की जरूरत बढ़ती चली जाती है। युवावस्था में किसी व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है। वहीं युवावस्था के गुजर जाने पर शरीर में कैल्शियम के अवशोषण की शक्ति कमजोर पड़ जाती है। वृद्धावस्था में हम जो कैल्शियम ग्रहण करते हैं शरीर उसे कम अवशोषित करता है। यही कारण है कि वृद्धावस्था आते-आते हमारे दांत और हड्डियां बहुत कमजोर हो जाते हैं। दांत टूटने लगते हैं। इसलिए बढ़ती उम्र के साथ कैल्शियम की मात्रा की आवश्यकता भी बढ़ती है। डॉ. राजेश बत्रा कहते हैं कि वृद्धावस्था में भी हम स्वस्थ और निरोग रह सकते हैं, हमारी हड्डियां और दांत मजबूत रह सकते हैं बशर्ते हम अपने शरीर में कैल्शियम के साथ-साथ दूसरे पोषक तत्वों की मात्रा को कम न होने दें।
कमी होने पर
कैल्शियम की कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। यह मस्तिष्क और दिल की धड़कनों के लिए भी अच्छा पोषक तत्व है। इसकी कमी से मस्तिष्क संबंधी रोग, हृदय संबंधी रोग, ब्रेन स्ट्रोक, थकान, हड्डियों और जोड़ों का दर्द, कमजोरी, दर्द की समस्या, नाखून का टूटना व भुरभुरा होना, नाड़ी की समस्या, कोलेस्ट्रॉल के स्तर का बढ़ना या असंतुलित होना और ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। इसकी कमी से महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता भी हो सकती है।
आहार से जोड़ें
डॉ. राजेश बत्रा कहते हैं कि कुछ लोग जिंदगी भर कैल्शियम की गोलियां खाते हैं लेकिन इसे प्राकृतिक रूप में लेना ही ठीक रहता है। क्योंकि जब तक आप कैल्शियम की गोलियां लेते हैं तब तक आपके शरीर में कैल्शियम की मात्रा ठीक रहती है और आप इसकी कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बच जाते हो। लेकिन जैसे ही आप इन गोलियों को खाना बंद करते हो, कैल्शियम की कमी फिर हो जाती है। इसलिए अगर हम आहार में कैल्शियम को जोड़ लेते हैं तो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम बनने लगता है जो शरीर में इसकी कमी नहीं होने देता। वहीं लंबे समय तक कैल्शियम की गोलियों का सेवन शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव भी डालता है।
दूध : दूध और दूध से बनी चीजें जैसे पनीर, दही, छाछ।
सफेद तिल : सफेद तिल कैल्शियम का बहुत अच्छा स्रोत है। तिल का दूध या तिल के लड्डू खाएं। तिल के दूध के लिए सफेद तिल को रात में भिंगोकर रखें फिर उसे पीस कर दूध तैयार कर लें।
सोयाबीन और मूंगफली : सोयाबीन, सोया मिल्क या टोफू में भरपूर कैल्शियम होता है। कच्ची मूंगफली को रात में भिंगोकर सुबह छिलका निकालकर खाएं। इसमें भी कैल्शियम भरपूर होता है।
सूखे मेवे : अंजीर, मुनक्का, पिस्ता, अखरोट, खरबूज-तरबूज के बीज।
फल और सब्जियां : संतरा, आंवला, नारियल की गिरी, सूखा नारियल, कीवी, अनानास, शकरकंद, शलजम, सेब, अमरूद, टमाटर। सब्जियों में ब्रोकली कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत है। पालक, सेम की फली, गवार फली, कमल ककड़ी, अरबी, रतालू, सूरन, कड़ी पत्ता, फालसा, गोभी और ब्रोकली के पत्तों में भी कैल्शियम भरपूर होता है।
अनाज और दालें : अनाज में बाजरा, रागी, मक्का। दाल में मूंग, मोठ एवं छोले। राजमा और लोबिया में कैल्शियम सबसे ज्यादा मात्रा में होता है। मसाला : जीरा, काली मिर्च, लौंग, अजवाइन।

