सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिनमें मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के लिए कोई दूसरा तरीका अपनाने की मांग की गई है। इन याचिकाओं में कहा गया है कि फांसी देना मौत की सजा देने का एक दर्दनाक तरीका है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों और केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल से कहा है कि अगर वे चाहें तो तीन सप्ताह के अंदर अपनी लिखित दलीलें दाखिल कर सकते हैं।

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