CJI Surya Kant News: जस्टिस सूर्य कांत ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इससे वह देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर पहुंचने वाले हरियाणा के पहले व्यक्ति बन गए। सीजेआई ने अपने अनुभव को शेयर किया है। उन्होंने बताया कि बचपन में उन्होंने कभी सीजेआई बनने की कल्पना भी नहीं की थी और उन्हें न्यायपालिका का मतलब भी नहीं पता था।
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, “पहले हर गांव के बच्चे के लिए संघर्ष का दौर था और मेरे लिए भी था। गांव के बच्चे बहुत मेहनत से पढ़ते थे और उनमे से कुछ बच्चे कामयाब होते थे। आमतौर पर गांव के हर एक परिवार में यह जिज्ञासा होती थी कि आपने अगर मैट्रिकुलेट कर लिया है तो आप नौकरी का प्रयास कीजिए। आप अगर गलती से कॉलेज में चले गए हैं तो फिर तो कुछ और करने का मतलब ही नहीं है। एक ऐसी स्थिति मेरे भी सामने आई।”
मेरे सीनिय का भी मुझ पर भरोसा था- मुख्य न्यायाधीश
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मैं मेरे माता-पिता को इस बात का पूरा श्रेय दूंगा कि मैंने जब ये अभिव्यक्त किया कि मैं आगे पढ़ना चाहता हूं तो उन्होंने मेरी बात को माना। फिर घर में ये द्वंद हुआ कि मैं पढ़ाई क्या करूं तो मेरे भाई की ये सलाह थी कि मैं एमए भूगोल में करूं। ऐसा इसलिए क्योंकि वो मेरा सब्जेक्ट था। मैं इस बात के लिए दृढ़ था कि मैंने लॉ करनी है। उस वक्त मैंने मन बना लिया था। मेरे माता-पिता ने मुझसे कहा कि जो चाहते हो वो करो। फिर इसके बाद मैंने लॉ किया। मैंने हिसार के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रैक्टिस की, चार-पांच महीने की प्रैक्टिस में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जो साहिब थे, मैंने उनकी कोर्ट में बहस की। मेरे सीनियर का मुझ पर भरोसा था, मैं इसके लिए उनका बहुत ही आभारी हूं। मुझे बनाने में उनका भी बहुत ही बड़ा योगदान था।”
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मैं अपने माता-पिता का आभारी हूं- सीजेआई सूर्य कांत
सीजेआई सूर्य कांत ने आगे कहा, “डिस्ट्रिक्ट जज साहिब ने जितने भी सीनियर वकील थे, उनको बुलाकर कहा कि इस लड़के को यहां पर खराब मत कीजिए। इसको हाई कोर्ट जाने की प्रेरणा दो। मैं हाई कोर्ट में किसी को नहीं जानता था। मेरे सीनियर और बाकी सीनियर लोगों ने कहा कि हम लेकर जाएंगे। एक बहुत बड़े विद्वान सीनियर एडवोकेट थे वो मुझे अपनी गाड़ी में लेकर गए थे। वहां पर एक सीनियर एडवोकेट के पास जाकर छोड़ा। ये मेरे माता-पिता, मेरे गुरुओ का आशीर्वाद था कि इस प्रोफेशन में मैने नाम कमाया। पांच-छह साल की प्रैक्टिस के बाद पूरा स्टेट मुझे जानता था कि ये एक सफल वकील है। फिर मेरे संघर्ष से सफलता की कहानी शुरू हुई।”
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