Sabarimala Deaths: केरल हाई कोर्ट ने शनिवार को इस बात पर हैरानी और निराशा व्यक्त की कि सबरीमला में सन्निधानम की तीर्थयात्रा के दौरान मरने वाले श्रद्धालुओं के पार्थिव शरीर को स्ट्रेचर पर पंबा तक ले जाया जा रहा है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि इसे तत्काल बंद किया जाए और इसके स्थान पर एम्बुलेंस का इस्तेमाल किया जाए।
हाई कोर्ट ने कहा कि पैदल पथ का उपयोग करने वाले अन्य तीर्थयात्रियों को ‘‘कठिनाई और असहज स्थिति से बचाने’’ और ‘‘सभी चरणों में मृतक की गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करने’’ के लिए पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए एम्बुलेंस का उपयोग किया जाएगा।
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की पीठ ने सबरीमाला विशेष आयुक्त की रिपोर्ट के बाद यह निर्देश जारी किया, जिसमें मृतक श्रद्धालुओं के पार्थिव शरीर को सन्निधानम से पंबा ले जाने के लिए एम्बुलेंस की आवश्यकता को रेखांकित किया गया था। विशेष आयुक्त ने कहा था कि वर्तमान में तीर्थयात्रा के दौरान हृदयाघात से मरने वाले श्रद्धालुओं के पार्थिव शरीर को स्ट्रेचर पर सन्निधानम से पंबा ले जाया जाता है।
कोर्ट ने इस मामले में प्रस्तुत तथ्यों पर विचार करने के बाद कहा कि पीठ का मानना था कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को सन्निधानम से पंबा तक पार्थिव शरीर ले जाने के लिए पुरानी एम्बुलेंस का उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है।
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पीठ ने कहा,‘‘यह व्यवस्था अगले आदेश तक या इस उद्देश्य के लिए अधिक उपयुक्त वाहन उपलब्ध होने तक जारी रहेगी। हम यह स्पष्ट करते हैं कि उक्त एम्बुलेंस का उपयोग केवल उपरोक्त अनुमत उद्देश्य के लिए ही किया जाएगा।’’
अदालत ने कहा कि दो महीने तक चलने वाले वार्षिक ‘मंडलम-मकरविलक्कु’ तीर्थ यात्रा के दौरान लगभग 150 दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें से 40-42 की दुर्भाग्यवश मौत हो जाती है।
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