Delhi High Court News: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को राजधानी में रैन बसेरों की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को सख्त निर्देश दिए कि वे ठिठुरती सर्दी से लोगों की रक्षा के लिए पर्याप्त और उपयुक्त सुविधाएं सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि रैन बसेरों में रहने वाले लोग इस कड़ाके की सर्दी से खुद को बचा सकें।”
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर हममें से किसी को, भगवान न करे, वहां एक रात भी रुकना पड़े, तो हमें नहीं पता कि क्या होगा। संवेदनशील रहें।”
दिल्ली हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
जस्टिस सी हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ द्वारा इस मुद्दे को न्यायालय के ध्यान में लाए जाने के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की गई थी। इसमें कहा गया था कि दिल्ली में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंचने के बावजूद, अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कई मरीज और उनके परिवार रैन बसेरों में जगह की कमी के कारण एम्स मेट्रो स्टेशन के बाहर खुले आसमान के नीचे सो रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई लोग उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और बिहार से आए थे, लेकिन उनके पास दिल्ली में किसी भी आवास में ठहरने का खर्च उठाने का कोई साधन नहीं था।
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14 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार यानी 14 जनवरी के लिए तय की है और अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि रैन बसेरों में ठंड से बचाव के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। बता दें कि देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को बर्फीली हवाओं और कड़ाके की ठंड ने लोगों की कंपकंपी बढ़ा दी। सुबह कोहरा और धुंध छाई रही, जिससे विजिबिलिटी कम रही। दोपहर में धूप निकलने से कुछ राहत रही लेकिन शाम को तेज हवाओं ने ठंड और बढ़ा दी।
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