Thiruparankundram Hill Row: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर तमिलनाडु के वरिष्ठ अधिकारी तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी विवाद में अपने पूर्व आदेशों को लागू करने में विफल रहने का उचित कारण नहीं बताते हैं, तो उनके खिलाफ 2 फरवरी को अवमानना ​​के आरोप तय किए जाएंगे।

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने कहा कि इस मामले में अवमानना ​​का मामला कई तारीखों पर सूचीबद्ध होने के बावजूद, मदुरै कलेक्टर और डीसीपी ने अभी तक अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं किया है। इसके बजाय एक सरकारी वकील ने अदालत से हलफनामा दाखिल करने के लिए और समय देने का आग्रह किया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा, “क्या वे आज कोई लिखित जवाब दाखिल कर रहे हैं? वे आज जवाब दाखिल नहीं कर रहे हैं। इसलिए मैं सोमवार को आरोप तय करने के लिए मामले की सुनवाई स्थगित कर रहा हूं। आज मैंने उन्हें जवाब देने का मौका दिया था। वे जवाब नहीं देना चाहते। मामला दिसंबर के पहले हफ्ते में उठाया गया था, उनके पास लिखित में अपना पक्ष रखने के लिए पूरे चार हफ्ते का समय था। उन्होंने ऐसा नहीं किया। मैंने कारण बताने का मौका दिया, उन्होंने कारण नहीं बताया। मैं सोमवार को आरोप तय करने के लिए मामले की सुनवाई कर रहा हूं।”

आज तक न तो माफीनामा है और न ही पश्चाताप का कोई संकेत- जस्टिस स्वामीनाथन

न्यायाधीश ने आगे कहा कि वह इस मामले में नरम रुख अपनाने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अवमानना ​​तीन तरह की होती है, एक नहीं। सबसे गंभीर अवमानना ​इनिगो (डीसीपी) द्वारा की गई। पहला, प्राथमिक आदेश का उल्लंघन; दूसरा, बीएनएसएस के तहत निषेधाज्ञा जारी करना; तीसरा, यह जानते हुए भी कि इस न्यायालय द्वारा निषेधाज्ञा रद्द कर दी गई थी, डीसीपी ने आदेश के कार्यान्वयन का विरोध करने का दुस्साहस किया। उन्हें (जिला अधिकारियों को) जरा भी पछतावा नहीं है, क्या आप उम्मीद करते हैं कि न्यायालय इसे चुपचाप सहन कर लेगा? आज तक न तो माफीनामा है और न ही पश्चाताप का कोई संकेत।”

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आखिर क्या था पूरा मामला?

अब पूरे मामले की बात करें तो यह मदुरै में एक पवित्र पहाड़ी से संबंधित है, जिसमें अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर और सिकंदर बधुशा दरगाह दोनों हैं। दिसंबर 2025 में, जस्टिस स्वामीनाथन ने फैसला सुनाया कि पहाड़ी की दो चोटियों में से निचली चोटी पर स्थित एक पत्थर का स्तंभ, पहाड़ी पर स्थित मंदिर की संपत्ति पर बना एक दीपथून है। न्यायाधीश ने कहा कि हिंदू मंदिर को उची पिल्लैयार मंदिर में मौजूदा स्थान पर दीपक जलाने के अलावा, इस स्तंभ पर कार्तिकई दीपम जलाने की परंपरा को फिर से शुरू करना चाहिए। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि इस तरह दीपक जलाने से पास के दरगाह के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

राज्य अधिकारियों ने इस और संबंधित निर्देशों का पालन करने में विफल रहे। इसके बजाय, उन्होंने एकल न्यायाधीश के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी। 2025 का कार्तिकई दीपम उत्सव बिना दीप जले ही संपन्न हो गया। इसके बाद, इस साल 6 जनवरी को, डिवीजन बेंच ने इस मामले में एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखा। इसी बीच, राज्य अधिकारियों द्वारा एकल न्यायाधीश के निर्देशों का पालन न करने के विरोध में हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा अवमानना ​​का मामला दायर किया गया था।

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