पिछले साल की सबसे सफल टीमों में शुमार एफसी गोवा और चेन्नईयिन एफसी ने अपने नामी गिरामी कोचों पर फिर से विश्वास दिखाया लेकिन इस बार इंडियन सुपर लीग फुटबॉल टूर्नामेंट में जिको और मार्को मातेराजी ही नहीं बल्कि एंटेनियो हबास जैसे कुशल रणनीतिकार को भी मुंह की खानी पड़ी। जिको की एफसी गोवा, मातेराजी की चेन्नईयिन एफसी और हबास की एफसी पुणे तीनों को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था क्योंकि उनके पास कुशल कोच और उनके द्वारा तैयार की गयी संतुलित टीमें थी लेकिन ये तीनों टीमें सेमीफाइनल के लिये भी क्वालीफाई नहीं कर पायी। जिको, मातेराजी और हबास बीते तीन सत्र से आईएसएल के साथ हैं और इस सत्र की शुरुआत के समय इनके नामों के साथ सफल कोचों का तमगा लगा था। इन तीनों की 2016 की नाकाम यात्रा के अलग-अलग कारण हो सकते हैं लेकिन जिन क्लबों ने इन्हें अपने साथ बनाए रखा या फिर नए सिरे से इन्हें अपने साथ जोड़ा उन्हें इनसे काफी अधिक उम्मीद थी।
फुटबॉल के जानकार पॉल मासेफील्ड का मानना है कि शीर्ष कोचों की नाकामी के एक नहीं बल्कि कई कारण रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इनमें से एक कारण यह है कि दूसरी टीमों ने इस दौरान खुद को काफी मजबूत किया। साथ ही साथ नाकाम क्लब प्रमुख खिलाड़ियों को अपनी ओर नहीं खींच सके तथा इनके मार्की खिलाड़ियों ने भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। कम से कम गोवा और चेन्नई के बारे में तो यह कहा ही जा सकता है।’ बर्मिघम सिटी एफसी के पूर्व खिलाड़ी मासेफील्ड ने कहा, ‘यह लीग पहले से अधिक दमदार और प्रतिस्पर्धी हो गयी है।’ न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम तथा नॉर्थईस्ट युनाइटेड एफसी के पूर्व मुख्य कोच रिकी हेरबर्ट का मानना है कि आईएसएल अब तकनीकी और रणनीतिक रूप से काफी सम्पन्न हो गया है। हेरबर्ट ने कहा, ‘आईएसएल कई विभागों में लगातार उन्नति करेगा। यहां खिलाड़ियों और टीमों का स्तर लगातार सुधरेगा। कोच रणनीति के आधार पर पहले से अधिक सम्पन्न होंगे और वे हर समय एक दूसरे की काट निकालने में व्यस्त रहेंगे। यह लीग के लिए अच्छा है।’
आईएसएल में कमेंटेटर के तौर पर कार्यरत हेरबर्ट ने कहा, ‘जो टीमें नाकाम रही हैं, उनकी नाकामी के पीछे सही संयोजन न बना पाना शामिल रहा है। चेन्नई इस साल एलानो ब्लूमर और स्टीवन मेंडोजा जैसे खिलाड़ियों को रिटेन नहीं कर सका जबकि गोवा की टीम लियो माउरा को भूल गई। इन कारणों से भी इन टीमों को बाहर का रास्ता देखना पड़ा।’ मजेदार बात यह है कि सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाली चार टीमों के कोच आईएसएल के लिए नए हैं लेकिन इसके बाद भी वे अपनी टीमों के सफलता दिलाने में सफल रहे। जियानलुका जाम्ब्रोता (दिल्ली डायनामोज), जोस मोलिना (एटलेटिको डि कोलकाता), अलेक्सांद्र गुइमाराएस (मुंबई) और स्टीव कोपेल (केरल ब्लास्टर्स) ने कम अपेक्षाओं के बावजूद अपनी टीमों को सफलता दिलायी और इन्हें खिताब की दौड़ में बनाए रखा।
मासेफील्ड ने कहा, ‘जाहिर तौर पर नए विचारों और खेल की समझ ने इन टीमों की मदद की है। मैं यह भी मानता हूं कि इन टीमों को शुरुआती दौर में नाकामी मिली लेकिन बाद में ये संभली और फिर अपने लिए उपयुक्त अंक जुटाकर सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहीं।’ हेरबर्ट ने कहा, ‘जाम्ब्रोता और मोलिना को ऐसी टीमें मिलीं, जिन्होंने बीते सीजन में अच्छा प्रदर्शन किया था। ये टीमों बीते दो सीजन में सिर्फ सेमीफाइनल में हारी थीं जबकि गुइमाराएस ने इस साल मुम्बई को अगले चरण में पहुंचा दिया।’ आईएसएल-3 के सेमीफाइनल में मुम्बई का सामना पहले सीजन के विजेता कोलकाता से जबकि दूसरे सेमीफाइनल में दिल्ली का केरल से होगा।
