भारत की पिंकी बालहारा ने जकार्ता में चल रहे 18वें एशियाई खेलों के 10वें दिन मंगलवार को कुराश में सिल्वर मेडल हासिल किया। पिंकी ने महिलाओं की 52 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता और इस खेल में भारत की ओर से मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बनीं। दिल्ली की रहने वाली 19 साल की पिंकी के लिए जकार्ता जाकर मेडल जीतने का यह सफर कतई आसान नहीं था। महीने भर के अंदर ही पिंकी के घर में तीन-तीन मौत हो गई। चचेरे भाई, पिता और दादा के मौत के बाद भी पिंकी नहीं टूटी और रोजाना कुराश की प्रैक्टिस करती रहीं। ऐसे समय में पिंकी को मामा का साथ मिला। लोगों के ताने के डर से मामा छिपकर उनकी ट्रेनिंग कराया करते थे। पिंकी के पिता का सपना था कि वह अपनी बेटी के साथ जकार्ता जाए और एशियाई खेलों में बेटी को हिस्सा लेते हुए देखें, लेकिन इससे पहले ही दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। पिता के मौत के 10 दिन बाद ही पिंकी के दादा भी गुजर गए। पिंकी के दादा अपने बेटे की मौत का सदमा बर्दाशत नहीं कर सकें।
इसी बीच पिंकी को सीनियर नेशनल, जूनियर नेशनल और एशियाई खेलों का ट्रायल भी देना था। पिंकी ने तीनों ही जगह पदक अपने नाम किया और एशियाई खेलों के लिए कुराश में अपनी जगह भी बना ली। दिल्ली के नेबसराय की रहने वाली पिंकी ने जीत के बाद इसका श्रेय अपने पिता, दादा और मामा को दिया। उन्होंने अपना सिल्वर मेडल इन्हीं लोगों के नाम समर्पित किया। बता दें कि कुराश भारत के देसी खेल पहलवानी जैसा होता है।
पिंकी ने अंतिम चार के मुकाबले में उज्बेकिस्तान की अबदुमनाजिडोवा ओयुसुलव को 3-0 से मात देकर फाइनल का टिकट कटाया था। इससे पहले उन्होंने क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया कुसुमवारदानी टेरी सुसांती को 3-0 से शिकस्त दे सेमीफाइनल में जगह पक्की की थी। जबकि मालाप्रभा को सेमीफाइनल में हार मिली। उज्बेकिस्तान की गुलनोर सुल्यामानोव ने मालाप्रभा को 10-0 से शिकस्त से उनको फाइनल में जाने से रोक दिया।
