एशियाई खेलों में शुक्रवार को भारत को बड़ा झटका तब लगा जब भारतीय महिला व पुरुष टीमों को कबड्डी के फाइनल मैच में हार का मुंह देखना पड़ा। ईरान के हाथों हार मिलते ही टीम का गोल्ड जीतने का सपना भी टूट गया। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन भारतीय महिला टीम को हराने वाली ईरान की खिलाड़ियों को मजबूत बनाने के पीछे पूर्व भारतीय कोच शैलजा जैनेंद्र कुमार जैन का बड़ा योगदान है। मौजूदा समय में शैलजा ईरान की टीम की कोच हैं, लेकिन 18 महीने पहले तक वह भारतीय महिला टीम की कोच हुआ करती थीं। शैलजा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि कबड्डी फेडरेशन ने उन्हें निकाल दिया, जिसके बाद उन्होंने खुद को साबित करने के लिए बतौर कोच ईरान की टीम को ज्वॉइन किया। शैलजा ने कहा कि एक भारतीय होने के नाते उन्हें दुख है कि भारतीय टीम इस बार गोल्ड हासिल नहीं कर सकी, लेकिन बतौर कोच ईरान के लिए बेहद खुश हूं। इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए शैलजा ने ईरानी खिलाड़ियों पर काफी मेहनत की है। उन्होंने टीम की दिनचर्या में योग, प्राणायाम को शामिल किया।
शैलजा के मुताबिक ईरानी लड़कियों फिटनेस के मामले में सर्तक रहती हैं, उनकी यह खूबी उन्हें दूसरों से अलग करती है। शैलजा ने बताया की टीम को ज्वॉइन करते समय शुरुआत में उन्हें कुछ समस्या हुई, क्योंकि वो शाकाहारी थी और भाषा भी समस्या थी। लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ-साथ वह अपने आपको वहां कके कल्चर में ढालने में कामयाबहो गई। जब ईरान की टीम का प्रस्ताव उनके सामने आया तो उन्होंने इसे चुनौती की तरह लिया।
बता दें कि ईरान ने पुरुष कब्ड्डी के फाइनल में कोरिया को 26-16 के अंतर से मात देकर पहली बार गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। ईरान ने सेमीफाइनल में भारत को मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी। 1990 में एशियाई खेलों में कबड्डी को पहली बार दाखिल किया गया था और तब से भारत ही इस स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाता आ रहा था। इस बार ईरान ने सेमीफाइनल में भारत को एकतरफा मात देते हुए न सिर्फ उसके वर्चस्व को समाप्त किया बल्कि फाइनल में जीत हासिल कर नया इतिहास रचा। ईरान की महिला टीम भी स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही है। उसने भारत को 27-14 से मात देकर सोने का तमगा हासिल किया।

