ऑस्ट्रेलिया पर जूनियर विश्व कप हॉकी सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट में मिली जीत को खिलाड़ियों की मानसिक दृढ़ता और टीम प्रयास का नतीजा बताते हुए भारतीय टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने कहा कि मैच दर मैच लक्ष्य लेकर चलने से उन्हें सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। स्पेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल के बाद सेमीफाइनल में भी एक गोल से पिछड़ने के बाद भारत ने वापसी करते हुए जीत दर्ज की। हरेंद्र ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा,‘इस टीम को हमने मानसिक रूप से काफी मजबूत बनाया है। गोल गंवाने के बाद भी खिलाड़ी हड़बड़ाते नहीं और अपना आपा नहीं खोते। इस टीम में जीत की भूख है और इसके लिये वे अपना शत प्रतिशत देने को तत्पर रहते हैं।’ उन्होंने कहा,‘हमने टूर्नामेंट में शुरू ही से मैच दर मैच लक्ष्य तय किये और फाइनल तक पहुंचे। अब 18 दिसंबर को इन लड़कों को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा मैच खेलना है और मुझे उम्मीद है कि ये निराश नहीं करेंगे।’
कप्तान हरजीत सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों को जो भूमिका सौंपी गई थी, वह सभी ने बखूबी निभाई। उन्होंने कहा,‘हर खिलाड़ी ने अपनी भूमिका बाखूब निभाई और मैदान पर आपसी तालमेल कमाल का था। इससे हम कभी दबाव में नहीं आये। जीत के बावजूद प्रदर्शन में सुधार की गुंजाइश है और हम करेंगे।’ भारत को अब फाइनल में बेल्जियम से खेलना है जिसने वालेंशिया में हाल ही में चार देशों के टूर्नामेंट में भारत को ग्रुप चरण मे हराया था। भारत ने वह टूर्नामेंट जीता था। भारतीय टीम के मैनेजर और सीनियर टीम के कोच रोलेंट ओल्टमेंस ने बेल्जियम के बारे में पूछने पर कहा,‘निश्चित तौर पर जो टीम जर्मनी और नीदरलैंड को हराकर फाइनल में पहुंची है, वह मजबूत तो होगी ही। हमारे पास भी मजबूत टीम है और मुझे यकीन है कि हम इस लय को कायम रखेंगे।’ ऑस्ट्रेलिया के कोच बेन बिशप ने कहा कि यह मुकाबला बराबरी का था और पेनल्टी शूटआउट में पासा कहीं भी पलट सकता है। उन्होंने कहा,‘क्वॉर्टर फाइनल की ही तरह यह भी बराबरी का मैच था। भारत ने गेंद पर नियंत्रण में बाजी मारी और आक्रामक खेल दिखाया। हम बेहद मजबूत टीम से हारे लेकिन अपनी टीम के प्रदर्शन से मैं निराश नहीं हूं।’

