ओलंपिक खेलों की शुरुआत से पहले भी कई देश अपने यहां अलग-अलग तरह की प्रतियोगिताएं कराते रहे हैं। साथ ही ग्रीस में इस भी ऐसी प्रतियोगिताओं का चलन था। 19वीं शताब्दी में बरों पियरे डी कुवर्तेन ने इसे विश्व पटल पर लाने का काम किया। ओलंपिक के आयोजन का मुख्य मकसद सभी देशों के बीच शांति का पैगाम देना था। कुवर्तेन ने 1896 में पहली बार सभी प्राचीन खेलों को एक मंच पर लाकर उन्हें दुनिया के सामने रखा। इसके बाद 1896 में ग्रीस की राजधानी एथेंस में पूर्ण रूप से ओलंपिक का जन्म हुआ। लेकिन, दुनिया की महाशक्तियों ने इसे तवज्जो नहीं दी। यही कारण रहा कि शुरुआती सालों में लगभग 14 देश के 241 खिलाड़ी ही इसका हिस्सा बन पाए।

1928 में आठवें ओलंपिक की मेजबानी एम्सटर्डम को मिली और यही से पहली बार ओलंपिका मशाल का सफर शुरु हुआ। यहां एक ऊंची मीनार पर ओलंपिक मशाल जलाई गई जो पूरे खेल के दौरान जलती रही। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में पहली बार मशाल यात्रा शुरू हुई। मशाल को मेजबान देश के अलावा अन्य देशों में भी घुमाया जाने लगा। इसी परंपरा को आज तक आयोजक देश निभाते आ रहे हैं।

तकनीक और साहस का प्रदर्शन

1952 के ओस्लो ओलंपिक में मशाल ने पहली बार हवाई मार्ग से यात्रा की। वहीं 1956 के स्कॉटहोम ओलंपिक के दौरान मशाल की यात्रा घोड़े की पीठ पर संपन्न हुई। 1968 में मशाल को मैक्सिको से समुद्र के रास्ते दुनिया का भ्रमण कराया गया था। 1976 के मांट्रियल ओलंपिक में कनाडा ने एथेंस से ओटावा तक मशाल के सफर का सेटेलाइट प्रसारण भी किया था। 1994 के लिलेहैमल शीतकालीन खेलों के दौरान पैराजंपरों ने पहली बार हवा में मशाल का आदान-प्रदान किया। इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए 2000 के सिडनी ओलंपिक में मशाल को ग्रेट बैरियर रीफ के पास समुद्र की गहराइयों में उतारा गया।

तोक्यो में चेरी ब्लासम

तोक्यो ओलंपिक के आयोजकों के मुताबिक, मशाल का ऊपरी हिस्सा चेरी ब्लासम के आकार का होगा। उन्होंने बताया कि इसमें बनाने में वही तकनीक और धातु इस्तेमाल की गई है जो बुलेट ट्रेन बनाने में की जाती है। यह सुनहरे गुलाब की तरह होगा जो 71 सेंटीमीटर लंबा और एक किलो 200 ग्राम का होगा। साथ ही इसमें 2011 में भूकंप और सुनामी पीड़ितों के लिए अस्थायी मकान बनाने में उपयोग किए गए एल्युमीनियम से निकले अपशिष्टों का इस्तेमाल किया गया है। ओलंपिक मशाल रिले फुकुशिमा से 26 मार्च 2020 को शुरू होगी जो 10 जुलाई को तोक्यो पहुंचेगी।

संदीप भूषण