अभिनेता आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ बॉक्स आॅफिस पर छायी हुई है। बॉक्स आॅफिस पर फिल्म की सफलता से आमिर खान और फिल्म से जुड़े अन्य लोग बहुत खुश हैं, लेकिन एक व्यक्ति ऐसे भी हैं जो इस फिल्म से काफी आहत हुए हैं। उनका आरोप है कि फिल्म से उनकी छवि को आघात पहुंचा है। हम बात कर रहे हैं महिला रेसलर गीता फोगाट के रियल लाइफ कोच प्यारा राम की। प्यारा राम फिल्म दंगल में खुद की नकारात्मक छवि दिखाए जाने से नाराज हैं। उन्होंने कानूनी कार्रवाई पर विचार करने की भी बात कही है। फगवाड़ा में रहने वाले प्यारा राम ने नवभारत टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘जब लुधियाना में दंगल की शूटिंग चल रही थी तो मैं वहां गया था। मैंने वहां अभिनेता आमिर खान और निर्देशक से बात की। दोनों ने फिल्म की कहानी के बारे में मुझसे कोई बातचीत नहीं की और सिर्फ यह बताया गया कि फिल्म महावीर फोगाट और उनकी रेसलर बेटियों गीता-बबिता की कहानी पर बन रही है। मुझे इस बात का बिल्कुल भी आभाष नहीं था कि मेरी छवि को फिल्म में नकारात्मक दिखाया जाएगा।

दरअसल, दंगल फिल्म में एक सीक्वंस है, जिसमें दिखाया गया है कि गीता फोगाट जब फाइनल खेलने जा रही होती हैं तो उनके कोच साजिश रचकर उनके पिता महावीर फोगाट को एक अंधेरे कमरे में कैद करवा देते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि गीता के कोच नहीं चाहते हैं गीता की सफलता का श्रेय उनके पिता महावीर फोगाट को मिले। कोच अपनी साजिश में सफल रहते हैं, जिसके बाद फिल्म में उनका एक डायलॉग भी है, ‘क्रेडिट मेरे पापा को जाता है, जा ले ले क्रेडिट।’ अंधेरे कमरे में बंद महावीर अपनी बेटी का फाइनल मुकाबला नहीं देख पाते। प्यारा राम का कहना है कि फिल्म को रोचक बनाने के लिए ये मनगढंत कहानी बनायी गई है, हकीकत से इसका कोई सरोकार नहीं है।

दरअसल, फिल्म में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल के लिए गीता फोगाट का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की ऐंजलिना से दिखाया गया है। हकीकत में 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता की प्रतिद्वंद्वी का नाम एमिली बेंस्टेड था। इसी तरह फिल्म में गीता के कोच के रूप में प्रमोद कदम को दिखाया गया है, जबकि गेम्स के दौरान विमिंस टीम के कोच प्यारा राम सोंधी थे। क्लाइमेक्स में दिखाया गया है कि गीता फाइनल में बड़ी मुश्किल से जीतीं। हालांकि, भारतीय रेसलर ने एमिली को एकतरफा फाइट में 8-0 से शिकस्त दी थी।

प्यारा राम सोंधी ने एनबीटी को दिए गए इंटरव्यू में कहा, ‘मेरा एक शिष्य दंगल फिल्म देखकर आया। उसने मुझसे पूछा कि 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में कोच तो आप ही थे सर? मैनें कहा हां। उसके बाद उसने मुझसे सवाल किया, सर फाइनल से पहले आपने सचमुच गीता के पापा को एक अंधेरे कमरे में बंद करा दिया था? यह सुनकर मैं चौंक गया क्योंकि हकीकत में ऐसा कुछ भी हुआ ही नहीं था। महावीर के बारे में सब जानते हैं कि वह कितने सज्जन व्यक्ति हैं। उन्होंने हमारे काम में कभी दखल नहीं दिया। बेटियों के मुकाबलों के दौरान कई बार तो वह मौजूद भी नहीं रहते थे।’