मनीष कुमार जोशी
गलुरु की ऐश्वर्या पिस्से मोटर स्पोर्ट्स में विश्व खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। यह पूरे देश के लिए गर्व वाली बात है। ऐश्वर्या ने एक ऐसे खेल में कामयाबी हासिल की है जिसमें पुरुषों का वर्चस्व है। बाइक राइडिंग और मोटर ड्राइविंग को पुरुषों का खेल कहा जाता है। यह काफी महंगा खेल भी है और हर कोई इसमें हाथ नहीं आजमा सकता। बात जब करिअर की हो तो महिलाओं के लिए इस खेल का सुझाव शायद ही कोई दे। ऐसे में ऐश्वर्या की सफलता को किस तरह देखा जाए, ये भी एक बड़ा सवाल है। ऐश्वर्या की कामयाबी से क्या हासिल होगा? इस सफलता से लड़कियों में क्या संदेश जाएगा? क्या मोटर स्पोर्ट्स की ओर लड़कियां आकर्षित होंगी? जवाब है शायद नहीं, इस सफलता से ऐसा कुछ नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर होगा कि ऐश्वर्या का विश्व खिताब महिलाओं को अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने का हौसला देगा।
ऐश्वर्या ने हंगरी में एफआइएम विश्व कप के फाइनल राउंड के बाद खिताब अपने नाम किया। ऐश्वर्या ने इस टूर्नामेंट का पहला राउंड दुबई में जीता और उसके बाद पुर्तगाल में हुए दूसरे राउंड में वे तीसरे नंबर पर रहीं। तीसरे राउंड में पांचवां और चौथे चरण में चौथा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कुल 65 अंक हासिल किए जो सर्वाधिक थे और इस प्रकार उन्होंने एफआइएम का विश्व खिताब जीत लिया। दूसरे नंबर पर रीता विएरा रहीं जिन्हें 45 अंक मिले। ऐश्वर्या ने इस कामयाबी के लिए अपनी मेहनत और लगन को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि इस कामयाबी के लिए उन्होंने काफी कठिन समय गुजारा था लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा पर भरोसा था। आज वे भारतीय महिलाओं के हौसले की प्रतिनिधि बन गई हैं।
भारतीय महिलाएं उन्हें देखकर कामयाबी के लिए अपना हौसला बढ़ा सकती हैं। मोटर स्पोर्ट्स आम भारतीय महिला के बस की बात नहीं है। ऐश्वर्या को पिस्से विश्व खिताब जीतने से पूर्व काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इस युवा बाईकर को 2017 में गंभीर दुर्घटना से गुजरना पड़ा। इसमें उनकी कॉलर बॉन टूट गई थी। कॉलर बॉन को जोड़ने के लिए ऐश्वर्या को लंबे आॅपरेशन से गुजरना पड़ा। उन्होंने दो महीने अस्पताल में गुजारे। इसके बाद मोटर स्पोर्ट्स में उतरने का साहस करना मुश्किल था। ऐसे में उनके पिता ने हौसला दिया और उन्होंने इस खेल में वापसी की। अपनी मेहनत के बूते उन्होंने सफलता भी हासिल की और देश को गर्व का पल दिया।
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ऐश्वर्या को बचपन से ही स्टंट पसंद था। मोटर स्पोर्ट्स को करिअर बनने का ख्याल उन्हें 18 साल की उम्र मे आया। तब से उन्होंने सड़क को जीतने की यात्रा शुरू कर दी थी। उन्होंने बाइक रेसिंग के चार राष्ट्रीय खिताब जीते और 2016 व 2017 में रोड रैली चैंपियनशिप में भाग लिया। वो साल 2018 में स्पेन में आयोजित बजाज एरोगन विश्व रैली को पूरा करने वाली पहली भाारतीय महिला बनीं और यहीं से विश्व खिताब जीतने की नींव पड़ गई।

