कहा जाता है कि हुनर परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता है। इस बात को सही साबित कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में रहने वाले नीशु कुमार ने। नीशु कुमार मौजूदा वक्त में भारत की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का हिस्सा हैं। बता दें कि नीशु के पिता एक चपरासी हैं, लेकिन घर की परिस्थितियों को नीशु ने कभी भी अपनी कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया। नीशु कुमार ने सिर्फ 5 साल की उम्र से फुटबॉल खेलना शुरु कर दिया था। नीशु का कहना है कि उसकी कामयाबी में उसके स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर और सीनियर्स का बहुत बड़ा हाथ है। नीशु का कहना है कि उसके सभी दोस्त और घर वाले उसकी कामयाबी से बेहद खुश हैं।

नीशु ने बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत चंडीगढ़ फुटबॉल एकेडमी से की थी और उनका पहला बड़ा ब्रेक तब आया, जब उनका चयन साल 2016 में एएफसी की अंडर-19 फुटबॉल टीम के लिए हुआ। नीशु अब मुजफ्फरनगर में युवाओं के लिए आदर्श बन चुके हैं और उनके इलाके के लोग उन्हें रोनाल्डो भाई के नाम से पुकारते हैं। नीशु कुमार को शुरुआत में कोचिंग देने वाले उसके कोच कुलदीप का कहना है कि वह गांवों के कई बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग दे रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि इलाके के अन्य बच्चे भी फुटबॉल को करियर की तरह अपनाएंगे।

कठिन परिस्थितियों में अपने फुटबॉल करियर की शुरुआत करने वाले नीशु आज एक कामयाब फुटबॉलर हैं। हालिया इंडियन सुपर लीग के दौरान नीशु को बेंगलुरु फुटबॉल क्लब ने 1 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि देकर अपने साथ जोड़ा था। नीशु इससे पहले भारत की अंडर-15 और अंडर -16 टीमों का भी हिस्सा रह चुके हैं और इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, जापान, यूरोप और गल्फ देशों में भी टीम के साथ खेल चुके हैं। भारतीय फुटबॉल टीम के कोच स्टीफन कोन्सटेनटाइन की तारीफ करते हुए नीशु कुमार ने बताया कि उन्होंने स्टीफन से काफी कुछ सीखा है, वह बहुत ही अच्छे कोच हैं।