जब कोलकाता की गलियों में एक साधारण सा युवक पिता के साथ ब्लड बैकों तक बर्फ पहुंचाता है, तब शायद ही कोई सोच सकता है कि वही शख्स भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने का सपना देख रहा है। लेकिन यही हैं राजा दास। एक साधारण परिवार से निकलकर असाधारण मुकाम तक पहुंचने वाले भारत के पेंचक सिलाट चैंपियन। 33 वर्षीय राजा दास जब मैट पर उतरते हैं तो उनके वार सिर्फ प्रतिद्वंद्वी पर नहीं, बल्कि गरीबी, संघर्ष और हालात पर भी पड़ते हैं।
हथियारों की कोरियोग्राफी से मार्शल आर्ट तक
राजा दास को बचपन से ही मार्शल आर्ट का शौक था, लेकिन कराटे और ताइक्वांडो उन्हें आकर्षित नहीं करते थे। उनका झुकाव हथियारों की कोरियोग्राफी की ओर था। यही जुनून उन्हें पेंचक सिलाट तक लेकर आया। एक ऐसा मार्शल आर्ट जिसमें स्ट्राइक, ग्रैपलिंग, थ्रो और हथियारों का अद्भुत मेल होता है। साल 2017 में उन्होंने इस खेल की ट्रेनिंग शुरू की और जब पता चला कि पेंचक सिलाट 2018 एशियन गेम्स का हिस्सा है, तो उनका सपना और भी बड़ा हो गया।
इंडोनेशिया तक पहुंचा सपना
2018 एशियन गेम्स से पहले राजा इंडोनेशिया में एडवांस ट्रेनिंग कैंप का हिस्सा बने, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अनुभव की कमी के चलते क्वालिफाई नहीं कर सके। राजा बताते हैं, ‘उस अनुभव ने मुझे बता दिया कि मुझे किस स्तर तक पहुंचना है।’
ट्रेन हादसे ने बदली जिंदगी
2018 में हावड़ा में हुए एक दर्दनाक ट्रेन हादसे में राजा ने छोटे भाई को खो दिया। घर की जिम्मेदारी बढ़ गई। अब खेल के साथ-साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी राजा के कंधों पर थी। दिन में ट्रेनिंग, शाम को पिता के साथ बर्फ सप्लाई और खाली समय में फिजियोथेरेपी का कोर्स, ताकि कुछ अतिरिक्त कमाई हो सके।
राजा कहते हैं, ‘परिवार के लिए जो करना पड़े, वह करना ही पड़ता है, लेकिन मेरे घर वाले मेरे सपनों के साथ खड़े हैं, वे ही मेरी असली ताकत हैं।’ आज राजा भारत के सबसे लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले आर्टिस्टिक पेंचक सिलाट खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।
खेलो इंडिया बीच गेम्स में जीता स्वर्ण पदक
दीव के घोघला बीच पर आयोजित खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में राजा दास ने डिफेंडिंग चैंपियन और स्थानीय फेवरेट प्रसन्ना बेंद्रे को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। यह सिर्फ एक पदक नहीं था। यह उस संघर्ष की जीत थी, जो वर्षों से जारी थी।
राजा कहते हैं, ‘मेरा सपना है कि मैं भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतूं। सरकार और फेडरेशन का सहयोग मिल रहा है। मुझे पूरा भरोसा है कि यह सपना जरूर पूरा होगा।’
राजा दास सिर्फ खिलाड़ी नहीं, हौसले की मिसाल हैं। राजा दास की कहानी हमें सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हौसले बुलंद हों तो रास्ते खुद बन जाते हैं। बर्फ बेचने वाले पिता का बेटा आज भारत का गोल्डन फाइटर बन चुका है। यह कहानी हर उस युवा को प्रेरित करती है, जो सपने देखने की हिम्मत रखता है।
राजा दास का अब तक का प्रदर्शन
- राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2023: स्वर्ण पदक
- राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2024: स्वर्ण पदक
- राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2025: स्वर्ण पदक
- 2025 खेलो इंडिया बीच गेम्स: रजत पदक
- 22वें नेशनल गेम्स गोवा: रजत पदक
- एशियन चैंपियनशिप 2018: चौथा स्थान
- एशियन चैंपियनशिप 2019: चौथा स्थान
- वर्ल्ड बीच चैंपियनशिप थाइलैंड: पांचवां स्थान
- वर्ल्ड चैंपियनशिप अबुधाबी 2024: पांचवां स्थान
