आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर भारतीय टीम ने टैस्ट के बाद एक दिवसीय सीरीज में भी जीत हासिल इतिहास रचा है। तीन मैचों की एक दिवसीय शृंखला में भारत ने अंतिम मैच में सात विकेट से जीत दर्ज की। इसके साथ ही आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर पहली बार भारत ने किसी द्विपक्षीय शृंखला में फतह हासिल की है। टीम इंडिया की इस जीत में कई खिलाड़ियों ने अहम भूमिका अदा की। दरअसल, भारतीय टीम के आस्ट्रेलियाई दौरे से पहले कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। कुछ इसे भारतीय टीम के घरेलू शेर होने का दाग मिटाने का मौका मान रहे थे तो कुछ विश्व कप की तैयारी। टीम दोनों ही मामलों में कामयाब रही। उसने विदेशी जमीन पर जीत के साथ विश्व कप की तैयारी भी की और अपने दाग भी धो लिए।
जीत के हीरो रहे महेंद्र सिंह धोनी</strong>
भारत को एक दिवसीय सीरीज फतह करने में टीम के पूर्व कप्तान और ‘मिस्टर फिनिशर’ महेंद्र सिंह धोनी का अहम योगदान रहा। उन्होंने इस सीरीज में कुल 193 रन बनाए और रन का पीछा करते हुए औसत 100 के पार पहुंचाया। उन्होंने तीनों ही मैचों में अर्धशतकीय पारी खेली।
गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन
आस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में भारतीय टीम के गेंदबाजों ने धमाकेदार प्रदर्शन किया। उन्होंने विपक्षी टीम को कम स्कोर पर रोक कर अपने बल्लेबाजों को मानसिक रूप से मजबूत किया। एक तरफ तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने तीन मैचों में आठ विकेट चटकाए तो मोहम्मद शमी ने पांच विकेट हासिल किए। स्पिनरों का प्रदर्शन भी काफी (कुलदीप यादव, जडेजा और युजवेंद्र चहल) अच्छा रहा जिन्होंने 10 विकेट इस सीरीज में हासिल किए।
बल्लेबाजों का मिलाजुला योगदान
गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के बाद बल्लेबाजों ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई। जहां पहले मैच में हार के दौरान रोहित शर्मा ने शतक लगाया तो वहीं धोनी ने अर्धशतकीय पारी खेली। दूसरे मैच में कप्तान विराट कोहली ने 104 रन बनाए। तीसरे और निर्णायक मुकाबले में धोनी और केदार जाधव ने अर्धशतकीय पारी खेलकर भारत को इतिहास रचने का मौका दिया।
विराट की रणनीति
किसी भी मैच में जीत उसकी होती है जिसकी रणनीति मजबूत हो। आस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में भी भारतीय कप्तान ने मजबूत रणनीति तैयार की थी। उन्होंने खिलाड़ियों का बदलकर इस्तेमाल किया। इससे अनुभवहीन आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज और गेंदबाज उन्हें परख नहीं पाए। उन्होंने पहले दो मैचों में कुलदीप यादव को खेलने का मौका दिया और निर्णायक मुकाबले में युजवेंद्र चहल को उतारा जिन्होंने छह विकेट हासिल किए। इसके साथ अंतिम मैच में केदार जाधव को मौका देना भी फायदेमंद साबित हुआ जो आॅलराउंडर की कमी पूरी करने में कामयाब रहे।
